Prem Me Phir Se Jeene Lga Hu | Mid Night Diary| Raushan Kumar 'Suman'

प्रेम में फिर से जीने लगा हूँ | रौशन ‘सुमन’ मिश्रा

तुम्हें पाने की कोशिशें खाक करके,
खुद को पाने की राह पर चलने लगा हूँ।

देख ना ले नजरें कोई तस्वीर तुम्हारी,
बचपन के खिलौने सा छुपाने लगा हूँ।

शहर में बदनाम हैं मेरे नाम आजकल,
झूठी शराफतों के किस्से सुनने लगा हूँ।

मंजिले तुम्ही से होकर गुज़रती है मेरी,
बीच राहों में अचानक थमने लगा हूँ।

गिरफ्त कर ले या आजाद कर दो तुम,
पिंजरों से भी समझौता करने लगा हूँ।

मौत के राहें तकती हुई जिंदगी मेरी,
ना जाने प्रेम में फिर से जीने लगा हूँ।

 

-रौशन मिश्रा ‘सुमन’

 

Roshan 'Suman' Mishra
Roshan ‘Suman’ Mishra

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