फिर से | उत्तम कुमार

लो आ गया तेरे शहर में फिर से,
क्या होंगी कुछ मुलाकातें
फिर से,
मोहब्बत न हो तो न ही सही,
क्या होगीं कुछ बातें फिर से?

मानता हूँ कि गलतफहमी का
शिकार हो गई थी मोहब्बत मेरी,
तुझे रूलाया,गलती सारी थी
मेरी,
भूला कर पीछली सारी बातें,
क्या होंगी कुछ मुलाकातें
फिर से??

तेरी सजा का हकदार हूँ मैं,
आज भी तेरा प्यार हूँ मैं,
गुस्से में हो तो गुस्से में
ही सही,
क्या होंगी कुछ बातें फिर
से???

तेरा रूठकर चले जाना जायज था,
क्या करता वो वक्त ही अपना
नाजायज था,
इस दिल में मोहब्बत थी,है और
हमेशा रहेगी,
क्या तुम इसे करना चाहोगी
फिर से,
लो आ गया तेरे शहर में फिर से,
क्या हमसे करोगी मोहब्बत
फिर से????

 

– उत्तम कुमार  

 

Kumar Uttam
Uttam Kumar

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