परछाईं | प्रज्ज्वल नीरा मिश्रा | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

हर रिश्ते में ‘गम’ को,माँ ‘खुशियां’ कर देती है।
बन कर परछाईं,जीवन मे रंग भर देती है।

छोटी-छोटी बातों में भी बड़े बड़े सपने देखे।
उसको याद रहें जीवन के सारे-सब लेखे-जोखे।
दूर हो गए रिश्तों को भी संग कर देती हैं

बन कर परछाईं,जीवन मे रंग भर देती है…..

सबकी ख्वाहिस पूरी हो लाखों उसकी मजबूरी है।
जितना प्रेम लुटाती माँ, उतनी बेटों से दूरी हैं।
बच्चों की खातिर रातों को दिन कर देती हैं।

बन कर परछाईं,जीवन मे रंग भर देती है…..

फर्ज को किस्मत में लिखवाकर,माँ धरती पे आती हैं।
सच पूँछो तो घर की हर ख़ुशियाँ मुट्टी लाती हैं।
टूटे-फूटे शब्दों को दोहा कर देती है।

बन कर परछाईं,जीवन में रंग भर देती हैं…..

 

-प्रज्ज्वल नीरा मिश्रा

 

Prajjval Nira Mishra
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