पहली बार | अभिनव सक्सेना | #नज़्म

मेरी मुस्कुराहट हमेशा से झूठी नहीं थी,
और न ही मैं कभी उलझा हुआ था।

बस मोहब्बत से नफरत सी है तुम्हारे बाद।
तुम मुझे न तो मिल पायीं न मैं कभी खो ही पाया तुम्हे।

मग़र ढूंढता रहा हमेशा सूखे कुँए में पानी की तरह,
मेरी ख्वाहिशें भी वैसे ही सुख चुकी हैं इश्क की ख्वाहिशें,

कुआं अब खाली है,
एक वक्त था जब मुझ कुँए के आसपास लोग रहते थे,

मेरी वजह से लोगों की प्यास दूर होती थी,
मग़र तुम गयीं तो जैसे कुएँ को अंदरूनी पाताल से जोड़ने वाली कोई कड़ी भी आपने साथ ही ले गईं।

लोग अब भी आतें हैं मेरे पास आंखों में मेरे वो होने की चमक लिये,
जो मैं अब नहीं रहा,

मैं और कोई नहीं हूँ मैं बस एक कुआं हूँ..
सूखा कुंआ…तुम अब मेरी गहराई में उतर कर डूब नहीं सकते
सिर्फ फंस सकते हो।

 

 

-अभिनव

 

Abhinav Saxena
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