नफरत | अमिता गौतम

दिन है बदल रहा,रात है बदल रही।
मौसम है बदल रहा, सौगात है बदल रही।।
इस बदलाव मे ज़िंदगी तुम भी बदल गई,
क्या तुम्हे मुझसे नफ़रत सी हो गई ।।

न बातो मे मिठास, न आवाज़ मे नर्मी।
अब तो दिखती है बस बात बात पर गर्मी।
क्या मेरे लिए जो thi मोहब्बत वो खो गई ,
क्या तुम्हे मुझसे नफ़रत सी हो गई ।।

कोई नोकर जैसे मुफ़्त चाहते हो।
तुम तो मुझ पर अपना प्रभुत्व चाहते हो।।
मेरी ख्वाहिशे तो सिर्फ ख्वाहिशे रह गई,
क्या तुम्हे मुझसे नफ़रत सी हो गई।।

क्या करू शिकवा,क्या गिला दिखाऊ।
जब हमारी मोहब्बत ही नहीं बची तो तुम्हे क्या बताऊ।।
मै तो कल भी तनहा थी और आज फिर तनहा हो गई।
क्यों तुम्हे मुझसे नफ़रत सी हो गई।।

 

-अमिता गौतम

 

Amita Gautam
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