Mulakat | Mid Night Diary | Swati Goyal | Short Love Story

मुलाकात | स्वाति गोठवाल | शार्ट लव स्टोरी

कुछ मिनटो की मुलाकात अक्सर याद रहे जाती है | उपस्थित परिस्थितियों में भी अगर सोच के दायरे में वो चंद मिनटो की मुलाकात बार बार आकर तुम्हे तंग कर रही , तुम्हें वर्तमान की सच्चाई से उठा कर खुली आँखों वाले सपनो की डाल पर एहसासोे के झूले झूला रही है तो यकीनन उस कुछ मिनटो की मुलाकात में ऐसा ज़रूऱ कुछ हुअा होगा जिससे चेहरे की एक इंच वाली मुस्कुराहट ढाई इंच में बदल जाती है |

ऐसी ही एक मुलाक़ात मेरी यादो के संदूक में रखी है | जहां तक याद है मुझे इस यादो वाले संदूक पर मैंने वक्त की ईट रख दी थी ताला खरीदने का वक्त ही कहां मिला था | जब फोन नहीं करते हो अक्सर रात में तुम, फ़ुरसत तुम्हारी टहलने को निकलती है और तुम लेपटोप के साथ तुम अपनी राते बीताते हो तो मैं ये ईट हटाकर उस चंद मिनटो की मुलाकात से रूबरू हो जाती हूँ |

रूबरू होने के इस सिलसिले में मुझे तुम्हारी कमी नहीं लगती, लगती है कमी तो इस वक्त की, कई दफा़ तुम से ज़्यादा किमती मुझे ये यादो का संदूक लगता है |
इस मुलाकात से रूबरू होने का सिलसिला मुझे वही ले जाता है तुम्हारे पास |

मुलाकात की शुरुआत कुछ ऐसे हुई जैसे किसी टहनी से वो पत्ता बस गिरने के इंतज़ार में हो उसे पूरी उमर बस पतझड़ का इतजांर रहा, उसे इतजांर है ज़मीं से अपने मिलन का | जैसे उसका संपूर्ण जीवन ही सिर्फ इस मुलाकात के लिए बीता हो वैसे ही तुम्हें था इतजांर मुझ से मिलन का, इंतजाऱ था तो बस उस मौके जो तुम्हें मुझ से मिलवा दे |

तुम हाथ बडा कर अपने पास बुला रहे थे मैं अांखो से मनाकिए जाती और आहिस्ता आहिस्ता हमारे बीच का फ़ासला कम होता जाता |तुम पसीने में भीगे थे और में शर्म और घबराहट में तुमने सख्त हाथो से मेरी नज़रे ज़मीन से हटा कर अपनी नज़रो पर टिका ली, और मुझे अपनी मज़बूत गरम बाहों में भर लिया बस उसी लम्हात वक्त के सारे पैगम्बर अपना सही ठिकाना भूल गए, हुआ कुछ ऐसे मानो जैसै सातों आसमां एक साथ बरस रहे है |

किसी सूखी ज़मीं पर और धधक धधक के सूखी परत फटने को तैयार हो भिगने की लालसा में ,ना तो उस रोज़ आसमा रूकने को तैयार था ना जमीं तुमने कुछ यू गले लगाया की मेरा कद बड गया और तुम्हारी दिल की धड़कने अपने सीने पर सुनने लगी वो जकड़ वो पकड़ गरम सांसो की रफ्तार धीरे धीरे बड रही थी |

अपने चहरे पर तुम्हारे चहरे की ठंडक महसूस कर रही थी खामोशी के उस आलम में मेरे कानो के अलावा भी मेरा पूरा बदन तुम्हें सुन रहा था फिर सिढीयो से उतर रहे उस वक्त के पैगम्बर के पेरो का शोर आ गया मानो किसी बेहोशी को होश आ गया जैसे बदनाम जवानी को समझदारी आ गई जैसे एक नाटक का पहला भाग खत्म हुआ हो |

 

-स्वाति गोठवाल 

 

Swati Goyal
Swati Gothwal

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1 thought on “मुलाकात | स्वाति गोठवाल | शार्ट लव स्टोरी

  1. Bahut khoob Swati ji…..Padhi hi nahi mehsoos bhi karli hai aapke shabdon mai vo pehli mulakaat….
    #waqt ki eint…..Is the best part …Thanks for writing

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