Mukammal Ishq Se Pahle | Mid Night Diary | Shashwat Singh | #UnlockTheEmotion

मुकम्मल इश्क से पहले | शाश्वत सिंह | #अनलॉकदइमोशन

मैं ज़मीं से तारे तोड़ गया आसमाँ के लिए
मुझे मुआफ करना मेरी इस खता के लिए

जुर्म जिसके खातिर सारे की है मैंने
वह खुद दे तो मैं तैयार हूँ हर सज़ा के लिए

मुकम्मल इश्क से पहले काफ़ी दिल जलाया अपना
क्योंकि ज़ख्म होना जरूरी है दवा के लिए

ख्वाबों की लकीरें खींच रखी है सपनों के मकाँ पे
मुझे बस दरवाज़ा चाहिए अपने आस्ताँ के लिए

रात दिन वैसे भी गुज़रेंगे मेरे आसमाँ तले
क्या ज़रूरत है छत की मेरे मकाँ के लिए

अपनों के बदलने का एहसास पतंग को भी हो
शायद तभी रुख बदलना ज़रूरी है हवा के लिए

औकात ज्यादा है नहीं, “दर्पण” क्या देगा तुम्हें
हाँ मगर गज़लें ये लाया है यहाँ हर ज़ुबाँ के लिए

 

-शाश्वत सिंह

 

Shashwat Singh
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