Mujhse Tum Naraaz Thi Kya | Mid Night Diary | Prashant Sharma

मुझसे तुम नाराज़ थी क्या | प्रशान्त शर्मा

नाम मेरा, तुम्हारी आवाज़ थी क्या।
चाँद कल लाल हुए बैठा था, मुझसे तुम नाराज़ थी क्या।

बातें करते करते तुम चुप हो जाया करती थी।
जो मुझसे नहीं कही कभी, वो बातें राज़ थी क्या।

बेवफ़ाओं से कर बेठी हो मोहोबत्त तुम, बावफ़ा से न पूछा।
ऐसी क्या बेताबी थी, इतनी मोहताज़ थी क्या।

रकीब कहता है तुम तरन्नुम में नहीं रहती।
तरन्नुम में रहे कोई, तुम ऐसा साज़ थी क्या।

किसी झोंके की तरह तुम मुझे पार कर गयी।
खुदा जाने मुझमे कोई दराज़ थी क्या।

पुरे सहरा में हु भटका में पर दरिया न मिला।
तू कही न मिली, सहरा में मिराज थी क्या।

 

-प्रशान्त शर्मा 

 

Prashant Sharma
Prashant Sharma

429total visits,1visits today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: