Mohabbat Kiye Jaa Rahe Hain Sab | Mid Night Diary | Prashant Sharma

मोहब्बत किए जा रहे हैं सब | प्रशान्त शर्मा 

मोहब्बत मोहब्बत किए जा रहे हैं सब।
इलाज़ पता नही किसी को, बीमार हुए जा रहे हैं सब।

कोई बाज़ार मालुम होता है ये,
खैरात में दिल दिए जा रहे हैं सब।

वो जो महसूस होता है, सन्नाटो में।
चीख चीख कर उसे इश्क़ बता रहे हैं सब।

कह दिया किसी ने, मैखाने में इश्क़ का इलाज़ है।
तभी से देख रहा हु पीए जा रहे हैं सब।

सुबह होती है, शाम होती है, दिन होता है, रात होती है।
कमाल है, ऐसे ही जीए जा रहे हैं सब।

हर किसी से हो रहा है, देखो मज़ाक हो रहा है।
इश्क़ कह कर ये मज़ाक किए जा रहे हैं सब।

इश्क़ को मज़हब, पी को खुदा बना रखा है।
अजीब पागलपन है, महबूब का सजदा किए जा रहे हैं सब।

अर्रे छर्रे समझ बेठे है ग़ालिब खुद को।
शायरी आती नही, पर किए जा रहे हैं सब।

दावा करते है वो की वो इश्क़ में है।
मोहब्बत है क्या खबर नही, बस किए जा रहे हैं सब।

शिकायत करते है की, गिरेबान फ़टी की फ़टी रहती है।
धागा सुई में है नही, सीए जा रहे हैं सब।

शायर क्या हुआ मैं बेगाना हो गया हूँ।
सुनता नही कोई, पर बदनाम किए जा रहा हैं सब।

 

-प्रशान्त शर्मा 

 

Prashant Sharma
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