Mera Dard | Mid Night Diary | Kumar Jitendra

मेरा दर्द | कुमार जीतेन्द्र

मुझे एक दर्द है
की एक दर्द है मुझे
उलझन बस इतनी सी है
की क्या दर्द है मुझे ?

जो अपना सा कोई दे गया
क्या दर्द है वो ?
क्या दवा है दर्द की ?
या दर्द ही ख़ुद दवा है
ये दर्द है या मर्ज़ है ?

ये दर्द है मुझे
फ़िर भी एक दर्द है
की क्या दर्द है मुझे ?

तुझ से दूर रहना
या ख़ुद को खोजना
ये दर्द है मुझे ।

सर्फ़ मुझे ही है
या सब का दर्द है ये ?
मेरे इर्द – गिर्द घूमता
क्या हमदर्द है ये ?

चलो जो भी है
जैसा भी है
प्यारा सा दर्द है !

मेरा ख़ुद का दर्द है !
इतना तो तय है
बहुत दर्द है मुझे !

 

-कुमार जितेन्द्र

 

Kumar Jitendra
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