Matrabhoomi | Mid Night Diary | Shridhar Nath Gandhi

मातृभूमि | श्रीधर नाथ गाँधी

धन्य हूँ में ,
इस धन्य धरा पर ,
मेंने जन्म लिया ।

जिसका शीष हिमालय ,
चरणों में सागर ,
मेंने ऐसी अनुपम धरा पर जन्म लिया ।

जहाँ राम हुए जहाँ बुद्ध हुए ,
जहाँ नानक और महावीर हुए ,
मेंने उस पावन धरा पर जन्म लिया ।

जहाँ सदियो से गंगा यमुना कावेरी ,
मातृ रूप मे बहती आई ,
उस पुण्य मातृभूमि पर मेंने जन्म लिया ।

जिसका वैभव सदियों से अब तक ,
औरो को अपनी और खिंचता आया ,
ऐसी वैभवशाली धरा पर मेंने जन्म लिया ।

जहाँ सत्य अहिंसा त्याग क्षमा ,
और आतिथ्य सत्कार सिखाते हो ,
ऐसे उच्च संस्कारो की धरा पर मेंने जन्म लिया ।

जहाँ ज्ञान, मोक्ष निर्वाण शांति ,
और सदमार्ग दिखलाता हो ,
ऐसी पुनीत धरा पर मेंने जन्म लिया ।

जहाँ मौर्य शिवाजी और महाराणा जैसे,
वीर आज भी पैदा होते हो ,
ऐसी वीरो की वीरभूमि पर मेंने जन्म लिया ।

जहाँ चाणक्य, कालिदास ,
चरक, आर्यभट्ट जेसे विद्वान होते हो ,
मेंने ऐसी विद्वान धरा पर जन्म लिया ।

जहाँ योग, अजन्ता, और
भरतनाट्यम हो,
मेंने ऐसी कलाओं की धरा पर जन्म लिया ।

जहाँ गीता कुरान की शीखे ,
गुरुग्रंथसाहिब मे पढ़ाई जाती हो ।
मेंने ऐसे सहिष्णु राष्ट्र मे जन्म लिया ।

जहाँ जनता का शासन ,
चलता हो ,
मेंने ऐसे सबसे बड़े लोकतंत्र
मे जन्म लिया ।

जहाँ पंचशील और
गुटनिरपेक्ष ,
जेसी नीति हो,
मेंने ऐसे विश्वशंतिदुत देश मे जन्म लिया ।

जिसकी महानता के आगे ,
विश्व सदा नतमस्तक रहा ,
मेंने ऐसी महान मातृभूमि भारत मे जन्म लिया ।

 

-श्रीधर नाथ गांधी

 

Shridhar Nath Gandhi
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