Maithili Ki Prem Kahani | Mid Night Diary | Shreya Levy

मैथिलि की प्रेम कहानी | श्रेया लेवी

२५ सितम्बर २०००

कॉलेज में एक नयी लड़की आयी थी, मैथिली। बहुत सुन्दर है वो, बाल लम्बे लम्बे काली घटा से लगते है। हर बार की तरह नए एड-मिशन वालो की रैगिंग का प्रचलन था, नए बच्चो से कुछ अलग थी वो शांत सी, अल्हड, अपने में ही मस्त रहती थी, लेट एडमिशन हुआ था उसका तो रैगिंग से बच गयी थी।या ये कहिए किसी सीनियर ने अभी देखा ही नहीं था ।

अरे! मैं विवेक हूँ, ऐसे तो कोई नहीं, ये मेरी स्टोरी भी नहीं है, मैं क्लासमेट हूँ मैथिली का, अम्बर मेरा दोस्त है, अम्बर कौन है ये? ये आगे पता चलेगा। या यूँ कहिए मैं कथावाचक हूँ।

“कॉलेज में इंटर कॉलेज फेस्ट शुरू होने वाला था, सभी बहुत उत्सुक थे। 3rd year के बच्चो ने एक नाटक तैयार किया, लेकिन नाटक का हीरो तो अभी तक छुट्टियों पर ही है, मैंने कहा।

नाटक का हीरो अम्बर था, वो कॉलेज में होने वाली हर प्रतियोगिता में अव्वल आता था। दूसरे कॉलेज के सामने उसको ही हीरो बनना था, बस तीन महीने ही है प्रतियोगिता के लिए, सबने इस सवाल के साथ मेरी तरफ देखा। वो क्या चाहते है ये मैं जान गया और बोला की मैं अम्बर को कॉलेज आने के लिए बोल दूँगा।

शाम में कॉलेज से वापस आते वक्त अम्बर के घर चला गया तो पता चला की १५ दिन पहले ही वो वापस आ गया है। मैंने एक नोट छोड़ दिया उसके घर पर की “कॉलेज फेस्ट शुरू होने वाला है, कल से कॉलेज आ जाना।”

दूसरे दिन अम्बर कॉलेज आ गया, और तलाश शुरू हुई हीरो की हीरोइन की, बहुत तलाशा गया लेकिन नहीं मिली। तभी मेरे दिमाग में मैथिली का नाम आया, मैंने सोचा था कि इसी बहाने बात शुरू करुँगा, तभी ये सोचते हुए मैं और अम्बर साथ कैंटीन जाने लगे।

कैंटीन में वो थी “मैथिली” सफ़ेद कपड़ो में वो और भी सुन्दर लग रही थी, आज कुछ खास था क्या? मैं तो नहीं जानता। तभी मैथिली आयी केक की दो प्लेट ले कर बोला आज मेरा बर्थडे है, मैं तो मन्त्रमुद्घ सा बस उसे देखता रहा।

अम्बर ने झट से कहा “हैप्पी बर्थडे” इतने में ही वो चली गयी, अम्बर ने मुझसे पूछा मैथिली के बारे में, मैंने सब कुछ बता दिया। अगले ही पल अम्बर मैथिली के पास था वो दोनों बातें कर रहे थे, और मेरा दिल जल रहा था। देखते ही देखते दोनों में अच्छी दोस्ती हो गयी, और मैथिली नाटक की हीरोइन भी बन गयी।

कॉलेज ने नाटक में पहला स्थान जीता, और मैथिली-अम्बर के रिश्ते के बारे में सबको पता चल गया था। दो साल बीत गए, कॉलेज ख़तम हो गया। मैथिली और अम्बर अब भी साथ थे, ग्रेजुएशन की पार्टी अम्बर के घर थी, मेरा जाने का मन नहीं था।

अम्बर के दस बार बोलने पर मैं गया तो पता चला अम्बर मैथिली को शादी के लिए पूछने वाला था। ये सब सुनकर मेरा पार्टी में रहने का मन नहीं था, तभी अम्बर ने मैथिली को प्रोपोज़ कर दिया, मैथिली ने भी हाँ बोल दिया।

इतना सुनते ही मैं बाहर चला गया। दूसरे दिन अम्बर की मौत की खबर मिली और मैथिली कहाँ गयी किसी को पता नहीं चला। बस इतना पता था कार का एक्सीडेंट हुआ था, अम्बर की एक्सीडेंट के जगह ही मौत हो गयी थी। बहुत खोज – बीन के बाद पता चला कि गाड़ी मैथिली चला रही थी। मौक़े पर देखने वालों ने कहा कि लड़की ठीक थी और वो गाड़ी से उतर कर अँधेरे में कही चली गयी।

मैंने बहुत खोजने की कोशिश की थी मैथिली को, लेकिन किसी को उसका पूरा नाम नहीं पता था, न ही कोई जानता था की वो कहाँ रहती थी।

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आज १७ साल बाद में उस कॉलेज का प्रोफेसर हूँ जिस में कभी मैं पढ़ता था, आज मैंने फिर मैथिली को देखा वही रंग वही लिबास…. नाम पूछने पर पता लगा कि वो मैथिली वर्मा है।

लेकिन १७ साल पहले वो कौन थी ???
इसका जवाब मेरे पास भी नहीं।

 

-श्रेया लेवी

 

Shreya Levy
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