मैं व्यापारी हूँ | जय वर्मा | द लाफ्टर डोज़

हलवाई की दुकान पर जाके, मैंने कहा,
हमें चाहिए छैना।
हलवाई मुस्कुराया और बोला,
आइये भाई साब! है न।
एक है मलाई वाला और एक है सादा।
स्वाद एक सा है,
पर मलाई वाला है दाम में कुछ ज्यादा।

तो मैंने कहा,
भाई हमें चाहिए सादा , दे दो किलो का आधा।

उसने एक छैना, किनारे से सरकाया।
और चाशनी के तालाब में घुमाया।

एक – एक करके उसने पालीथीन भरी।
तोला तो 480 ग्राम निकली।
वो अन्दर गया और चाशनी लाया।
480 ग्राम को 500 बनाया।

मैंने कहा,
छैना बेच रहे हो कि चाशनी बड़े भाई।
480 ही रहने देते क्यों करी भरपाई।

तो बोला , भाई साब !
यही तो है ईमानदारी।
क्योंकि मैं हूं व्यापारी।

 

– जयहिन्द वर्मा ” जय”

 

Jay Verma
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