Main, Tum Aur Hum | Mid Night Diary | Pratibha Singh

मैं, तुम और हम | प्रतिभा सिंह

याद रखना हमें..
बस इतनी ही तो गुजारिश की थी…

राहों में चलते-चलते भूल ना जाना..
बस इतनी ही तो आरजू की थी…

मुझे तो कभी ये ख्याल भी ना आया था..
कि तुम हमें यू इस तरह भुला दोगे…

बातों का सिलसिला ना सही..
हमारी यादो का खजाना तो तुम्हें साथ रखना था ना…

तुम्हारा सफ़र हम मिल कर तय करेंगे..
वादा तो तुमने मुझसे यही किया था ना…

कहा था मैने, मुझे साथ ना ले चलो..
तब तुमने कहा था, नहीं हम साथ चलेंगे…

मैं तुमसे तुम्हारी कोई शिकायत नहीं कर रही..
पर बस इतना कहना चहती हूँ..
कि अब मैं और तुम हम नहीं रहे…

शायद वक्त की चादर बहुत छोटी थी..
जिसमें तुम हमें ना शामिल कर सकें…

पर हाँ मैंने कुछ सपने सज़ा लिए थे..
जिनके आज टूट जाने पर थोड़ा दर्द सा हो रहा हैं कही…

बे-वक्त ही जाने क्या खुदा ने ये साजिशे की थी..
जिन्हें ना तुम समझे ना मैं…

पररर… याद रखना हमें..
बस इतनी ही तो गुजारिश की थी ना…

खैर शुक्रिया हमारा.. और तुम्हारा..
जो अब मैं और तुम हम ना रहे…

 

 

-प्रतिभा सिंह

 

Pratibha Singh
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