Main Tha Tum Thi | Mid Night Diary | Amrit

मैं था तुम थी | अमृत

छटाँक भर लम्हो की दूरी पे,
तुम थी,

मुट्ठी भर कदमों की गिनती पे,
मैं था,

दूरियाँ बढ़ती गयी,
लम्हे घटते गए,
कदम चले,
मुठ्ठियाँ बड़ी होती गयी।

सफर की लहरों पे,
तुम थी,
रास्ते के किनारों पे,
मैं था,

आमतौर पर लहरें बढ़ती है किनारों की ओर,
इस दफा किनारे दौड़ते रहे,
इस किनारे से उस किनारे,
लहरें उफनती रहीं,
ऊँची और ऊँची

झोले भर वादों के किसी कोने में,
तुम थी,
उम्मीद की रुमाल की पोटली में बंधा,
मैं था,

पोटली मिला दी,
झोले में,
झोला उड़ेल दिया ,
पोटली बिछाकर,

अब उम्मीद की खुली रुमाल पे,
तुम थी,
झोले में वादों के बीच फँसा,
मैं था।

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