Main Kalakaar Kehlata Hun | Mid Night Diary | Vishakha Kamra

मैं कलाकार कहलाता हूँ | विशाखा कामरा | विश्व रंगमंच दिवस

मैदान हो या,
हो मंच सही,
हर गली-गली
में भीङ खङी

और देख मुझे
हर पेङ-पात पर
खुशहाली की
लङी लङी

उस लङी लङी
से चुनकर
कुछ चेहरों में
साँसे भरता हूँ

किरदारों में
जीवन भरकर
खुद को उसमें
सुलगाता हूँ,

और तब जाकर
कुछ लोगों में
मैं कलाकार कहलाता हूँ।

सब चेहरों में
इक चेहरा हूँ,
इक चेहरे में
संसार भी हूँ

सागर की बूंदें
बन जाऊँ,
उन बूंदों का
सागर भी हूँ

तपते सूरज में
सङको पर
खुद छाया का
किरदार बनूँ

मैं जीवनभर
फिर खुशी खुशी
संसार का भार
उठाता हूँ

और तब जाकर
कुछ लोगों में
मैं कलाकार कहलाता हूँ।

 

-विशाखा कामरा 

 

 Vishakha Kamra
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