Main Aaya Tere Gaon Me Savan Ke Sath | Mid Night Diary | Dharmendra Singh

Main Aaya Tere Gaon Me Savan Ke Sath

मैं आया तेरे गांव में सावन
के साथ

बागों में फूल खिले थे, पर इक
कली मुरझाई
देख मुझे वो लपक के दौड़ी आई
बर्षों बाद आया तू पत्थर दिल
सिपाही
कह के लगी गले से, वो मन ही मन
हर्षाई
घबराया मैं देख मेंहदी की
लाली उसके हाथ
मैं आया तेरे गांव में सावन
के साथ।

उसने भांपते हुए मेरे भाव,
मेंहदी की बजह बताई
कि वो तो उसकी सहेलियों ने
यूंही लगाई
ये सुनकर मेरी जान में जान आई
मेरे गालों की चुटकी लेकर वो
मुस्कुराई
चली वो आगे-आगे पकड़े मेरा
हाथ
मैं आया तेरे गांव में सावन
के साथ।

खेत-खलिहान, गली-मोहल्ले, नदी
नहरों
जाने कहाँ-कहाँ की परिक्रमा
उसने लगवाई
बाग में बैठ हमने कच्ची
अंवियां खाई
पुराने तालाब में एक डुबकी
भी लगाई
वो बरगद वाली दादी ने खिलाया
भात
मैं आया तेरे गांव में सावन
के साथ।

फिर इक दिन अचानक फौज से
चिट्ठी आई
सरहद पर छिड़ी थी एक आकस्मिक
लड़ाई
तूने मुझसे न जाने की जिद खूब
लगाई
पर अगले दिन ही सेना की गाड़ी
आई
गाड़ी में चल पड़ी आशिकों की
बारात
मैं आया तेरे गांव में सावन
के साथ।

चौखट के पीछे खड़ी तू खूब
रुसाई
“पहुंचकर एक चिट्ठी लिखना”
तेरे अंतिम लव्ज़ दिए थे
सुनाई
जंग की उस रात बेइंतहा तेरी
याद आई
जब सरहद पे तेरे इस सिपाही ने
वीरगति पाई
दिल में ही रह गई वो अधूरी सी
बात
मैं आया तेरे गांव में सावन
के साथ।

मैं आया तेरे गांव में सावन
के साथ।।

-धर्मेंद्र सिंह

 

Dharmendra Singh
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