Maa Sach Much Maa Hoti Hai | Mid Night Diary | Krishan Kumar Pandey | Mother's Day Special

माँ सचमुच माँ होती है | कृष्ण कुमार पाण्डेय | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

नौ महीने तक वो अपने अंदर, किसी को पाल सकती है,
बच्चा छोटा हो या बड़ा, वो बखूबी सँभाल सकती है,

देने को किसी को नया जीवन, वो दर्द अथाह सह सकती है,
खुद पे क्या बीती फर्क नहीं पड़ता, वो माँ ही है जो कुछ नहीं कहती है,

यूँ तो मातृत्व के सुख के आगे, वो सब कुछ भूल जाती है,
मगर न जाने क्यों आज कल, माँ के चेहरे पे एक चिंता नज़र आती है,

पापा चाहते थे की बेटी घर पे आये, मगर माँ को क्यों बेटे की आस है,
बेटी में आखिर क्या कमी होती है, और बेटा भला क्यों खास है,

माँ कह रही थी जाँच करा लो सब पता चल जायेगा,
बेटा हुआ तो ठीक बेटी हुयी तो मुझसे न पाला जायेगा,

आखिर क्यों सदियों से ये रीत चली आ रही है,
बेटे की चाहत में बेटियां कोख में ही मारी जा रही है,

मैंने तो सुना था कि माँ तो महान होती है,
बेटा हो या बेटी संताने सब समान होती है,

भला माँ क्यों माँ शब्द को कलंकित कर रही है,
मातृत्व का भाव छोड़ अब वो आतंकित कर रही है,

मेरे मन में अनगिनत सवाल पनप रहे थे,
जो मेरे अंदर ज्वाला बनके धधक रहे थे,

फिर एक रोज मेरी माँ से सपने में मुलाकात हुई,
माँ तू मुझसे क्यों रूठी है, इस प्रश्न से शुरू बात हुई,

तब माँ ने मुझे गले से लगाया और वो रोने लगी,
न जाने क्या मन में सोच रही थी न जाने कहाँ खोने लगी,

मगर सुन कर माँ का जवाब, मुझे बहुत हैरानी हुयी
उसने मेरे प्रश्नों का जो जवाब दिया, उससे खत्म मेरी परेशानी हुयी,

मेरी बेटी तू दुनिया में न आये इसी में तेरी भलाई है,
इंसानियत मर चुकी ही है, यहाँ हर जगह बस बुराई है

तेरे जन्म से पहले ही तेरी आबरू की चिंता सताने लगी है
ये दुनिया अब छोटी बच्चियों से भी हवस मिटाने लगी है

जैसे तैसे मैंने तुझे पाल भी लिया तो तेरी उम्र जैसे जैसे बढ़ने लगेगी,
तेरी माँ तेरी शादी और तेरे दहेज़ की चिंता करने लगेगी,

तेरे पिता तेरे दहेज को खातिर इस हद तक गुज़र जायेंगे
अगर मोल मिल तो वो खुद सरे बाजार बिक जायेंगे,

बेचकर अपने अस्तित्व को हम तुझे विदा कर भी देंगे,
शादी के बाद तेरे ससुराल वाले तुझे अनगिनत प्रताड़ना देंगे,

दहेज़ के लिए में तेरी आबरू लुटायी भी जा सकती है,
बेटी तू किसी दिन दहेज़ के लिए जलायी भी जा सकती है,

बेटी मै तुझे इसी लिए इस दुनिया में नहीं लाना चाहती हूँ,
सच तो ये है कि मैं तुझे इस दुनिया से बचाना चाहती हूँ,

बेटा मैं तेरी माँ हूँ तुझसे ज्यादा तेरी फ़िक्र करती हूँ,
तेरा भूत तेरा भविष्य सब जानती हूँ मगर नही जिक्र करती हूँ,

माँ के इन शब्दों ने मुझे मातृवत का अहसास करा दिया है,
माँ सचमुच माँ होती है मुझे ये विश्वास करा दिया है,
माँ सचमुच माँ होती है मुझे ये विश्वास करा दिया है,

 

-कृष्ण कुमार पाण्डेय

 

 

Krishan Kumar Pandey
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