Maa | Mid Night Diary | Anupama Verma | #UnlockTheEmotion

माँ | अनुपमा वर्मा | #अनलॉकदइमोशन

जब हमे बोलना नही आता था, तो भी तू समझ जाती थी
आज तू बोलती है तो हम कहते है “समझ नही आती”

सौ सौ बार बोलकर, तूने बोलना सिखाया
आज तुझे दूसरी बार भी जवाब देना, हमे रास ना आया

पूरे घर मे खाना लेकर, पीछे पीछे घूमा करती थी
हमने तो जाने कब आखिरी बार पूछा था “माँ तूने खाना खाया या नही”

हमारी शरारतो पर तू, कभी नही चिल्लाती थी
हम चिल्ला देते है अकसर गर जो तूझसे चाय भी फैल गयी

हमे नींद नही आती थी तो, तू लोरी गाकर सुलाती थी
और हमे तो पता ही नही, तू रात रो रो कर बीताती रही

हमारी नींद ना टूटे, तू कान्हा जी की आरती भी धीमी आवाज मे गाती थी
पर हमारे लिए तो पार्टी की शान, गाने की ऊँची आवाज जरूरी थी

हमारी चोट का मरहम बनकर, तू हमेशा हाजिर रहती थी
हमारे पास तो तेरी चोट, पूछने का ही वक्त नही

मेरा हाथ पकडकर माँ, तूने ही तो लिखना सिखाया था
तुझसे थपकी पाने की चाह ने ही तो, मुझे इतना सफल बनाया माँ

गोद मे लेकर जहाँ दिखाने वाली, माँ के घुटनो मे अब दर्द है
एक बार तो पास बैठकर कहो ,माँ हम तेरे संग है

हम जवान हो गए है और माँ मासूम बच्चे सी हो गयी है
पर मैने देखा है उसकी दुआए, अब भी उतना ही असर करती है

 

-अनुपमा वर्मा 

 

Anupama verma
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