माँ का साया | दीप्ति पाठक | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

वो ज़िन्दगी की तेज धूप में जो आँचल हमेशा मुझपर लहराया है, लगता है मेरी माँ का साया है,

वो चांदनी हर रात में यूँ जो चाँद मुझे देख मुस्कुराया है,लगता है मेरी माँ का संदेशा कोई लाया है।

वो जो हर गलत काम करने से पहले मेरा हाथ कंपकपया है, लगता है माँ का चेहरा इन आंखों में धुंध लाया है।

वो जो दर्द को मेरे,पलक झपकते ही आराम आया है , लगता है शायद माँ की दुआओं ने असर अपना दिखाया है।

वो जो अश्कों को मेरे मुस्कुराहट ने छुपाया है,लगता है माँ ने जैसे सिर पर प्यार से हाथ फिराया है।

वो जो किस्मत को मेरी फूलों से महकाया है,
लगता है माँ ने मेरी फिर से भगवान को आज फिर हराया है।।

ये दिल और धड़कन तो एक बहना है माँ, बाकी मैं तो ज़िंदा तुझसे हूँ, और मुझे तुझमें ही समाना है माँ।।

 

-दीप्ति पाठक

 

Deepti Pathak
Deepti Pathak

964total visits,3visits today

3 thoughts on “माँ का साया | दीप्ति पाठक | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

Leave a Reply