लेकिन तब तक...

लेकिन तब तक | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

तुम्हारे साथ यहाँ, इस बहती नदी के पुल पर बैठ कर सूरज को खुले आसमां में अपने पंख खोलते देखना चाहती थी, लेकिन तुम्हारे बाद अब सिर्फ इसको बादल के समन्दर में डूबता हुआ देखना अच्छा लगता है….

पता है आकाश, 
ये आसमाँ मुझे तुम लगते हो
और ये ढलता सूरज खुद मैं, जो दिन भर दूसरों को रोशन करते करते जब थक जाता है तो आकाश की आगोश में खो जाने लगता है।

आकाश की आगोश, वाह !
तुम तो शब्दों की कारीगरी भी सीख गयी…..

कारीगरी, ह्म्म्म….
तुम क्यों चले गए आकाश?
रुकना था न तुम्हे,
देखो न मैं आ गयी…

चला गया?
कौन गया दामिनी?
देखो मैं हूँ न आज भी,
तुम्हारे साथ
इस बहती नदी के ऊपर से
गुज़रते, बूढ़े हो चुके पुल पर…
इस ढलती शाम के साये में
तुम्हारे करीब।

हाँ वाकई….मेरे करीब
( सिगरेट की डिब्बी से एक सिगरेट निकाल कर हँसते हुए)

तुम मुझ में रम गए हो आकाश,
मैं जान ही नही पायी और न जाने कब तुम अपना ज़हर मुझ में घोलते चले गए, तुम्हारे जाने के बाद इसका असर शुरू हुआ जोकि हर पल सिर्फ मुझे तपाता ही रहता है।

और उस तपन से तुमने ये सिगरेट जलाना सीख ली होगी?

कब से शुरू की ये,
मुझे अपने अंदर रखती हो दम ब दम मुझे अंदर ही अंदर घोंट देने का इरादा भी मजबूत कर रही….

इरादा, आकाश किस इरादे की बात कर रहे हो, तुम जानते भी हो कि इरादे क्या होते?
ख्वाब किसे कहते?
हर पल याद कर के मरने के लिए जीना किसे कहते?

हाँ मैं नही जानता,न ही कुछ समझता
(सुर्ख लाल आँखें किसी दर्द के गवाही दे रही थी)

आकाश, माना कि हुई हैं गलतियां मुझसे,
लेकिन क्या उसकी सज़ा मुझे तुम्हे खोकर चुकानी पड़ेंगी?
क्या ये सही है?
क्या मैं इतनी बुरी हूँ कि अब तुम्हारा नाम तक लेने का हक़ खो दिया मैंने….

आकाश, आकाश, आकाश !!
सिर्फ आकाश ही तो चलता है मेरे दिमाग में… क्यों कर रहे हो बोलो, हाँ, बोलो न क्यों कर रहे हो????

क्या हुआ दामिनी,
ए दामिनी!!
लो पानी पी लो…

किससे झगड़ रही हो इतनी रात में?
कोई सपना देखा क्या?

सपना…

नही मम्मी,
बस यूँ ही….
सपनों का क्या है,
नींद टूटने पर वो भी टूट जाते।

कैसी बहकी बहकी बातें कर रही,
चलो सो जाओ !!

और दरवाज़े के पास खड़े आकाश ने भी उस रात मुझे सो जाने को बोल दिया,

…………..’सो जाओ दामिनी’
मैं तुम्हारे पास हूँ, हमेशा…

कभी कभी कुछ सवालों के जवाब नही होते,
समझ नही आ रहा कि आकाश सवाल था मेरी जिंदगी का या फिर मेरे वजूद का जवाब…..

फिर से मिला तो रोक लूँगी
और ये रहस्य सुलझा लूंगी,
लेकिन तब तक…??????????

-अस्तित्व

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