Lallan On the TOP! | Aman Singh | Kanpuriyaa Love Story

लल्लन ऑन द टॉप | अमन सिंह | कनपुरिया लव स्टोरी | बकैती

धीरे धीरे प्यार को बढाना है, हद से गुजर जाना है… ऍफ़.एम्. में बजते हुए गाने के साथ अपने लल्लन भैया फुल मौज में गुनगुनाये जा रहे थे कि तबही चंदू ने पीछे से आकर उनको टोक दिया, “ का बात है भैया जी पिछले चार दिन से देख रहे हैं आपको, आपका ध्यान काम में है नहीं, और यह क्या आज कल तो गुनगुनाने भी लगें हैं”

“अबे तुम न अपने काम पर ध्यान दो, हमारे मैटर में चोंच न डालो अपनी…” रोमांटिक मूड वाले लल्लन भैया एक दम से झन्ना गये, “एक तो साला यहाँ कुछ समझ नहीं आ रहा है और एक तुम हो, जो आ गये हो बकैती करने…”

“ये लेओ, अच्छा पहले ये पुड़िया फाको और फिर बको कि आखिर इतने लाल पीले काहे रहे हो आप?” चंदू ने राजश्री की पुड़िया लल्लन की तरफ बढ़ाते हुए कहा।

“अरे का बतावे यार, बस मोहब्बत हो गयी बिल्कुल फूल और काटें के अजय देवगन वाली… कौने काम में मन ही नहीं लग रहा है” लल्लन भैया बोलते बोलते सेंटी हो गये ।

“जे का कह रहे हो, सही मैं का? मतलब अब आप भी शाहरुख़ की तरह हाथ फैला के लड़की पटाओगे” चंदू ने मजे लेते हुए कहा।
“बस इसलिए साला हम तुमको बता नहीं रहे थे, मदद कौनो नहीं करेगा… बस मौज लेने के लिए कह दो”, लल्लन भैया गुस्सा होते हुए बोले।
“अरे लल्लन यार!”

“मतलब लल्लन भैया से सीधे लल्लन यार….” लल्लन भैया ने चंदू को टोकते हुए कहा।

“अरे भैया वो सब छोड़ो पहले ई बताओ, ऊ खुशनसीब आइटम…” चंदू अपनी बात पूरी बोलता उससे पहले ही लल्लन भैया ने उसे घूर के देखा, “अरे मतलब हमारी भाभी जिन्होंने आपका दिल चुरा लिया, कहाँ मिले? का बात हुई?”

“अरे यार यही तो दिक्कत है, कि हमको कुछ पता नहीं है..” लल्लन भैया ने मुह बनाते हुए कहा । लल्लन भैया आगे कुछ और बोलते उससे पहले उनके पिता जी दुकान पर आ गये और आते ही उन्होंने लल्लन को कचेहरी के पास वाली दुकान से गरमागरम समोसे लाने को बोल दिया ।

“अरे भैया आप टेंशन न लो, पहले यह गरमागरम समोसा हौको और पूरी बात बताओ हमको, हम देखते हैं कौन रोकता है, आपकी प्रेम कहानी को पूरा होने से…” चंदू ने भरोसे का समोसा लल्लन भैया की तरफ़ बढ़ाते हुए कहा और सब जानने की कोशिश की ।

“अबे अभी इतवार के दिन पापा दुकान आये नहीं, तो बस हमको आना पड़ा सुबह सुबह जल्दी से दूकान खोलने के लिए… हम दुकान खोल के बैठे ही थे कि थोड़ी देर बाद घर के पास वाली दुबे आंटी आ गयी । बोलीं, बेटा घर छोड़ दो घुटनों में दर्द हो रहा है, चलने में तकलीफ हो रही है ।”

“अरे भैया, पॉइंट की बात करो…” चंदू ने रोकते हुए कहा ।

“अबे आराम से समोसा खाओ, गर्म है, मुहं न जला लेना अपना… और सुनो बता तो रहें हैं । उनको देखते ही साला मन किया मना कर दें, एक तो दूकान बस खोले ही भर थे, बोहनी भी नहीं हुई.. ऊपर से ये और आ गयी, कि बेटा घर छोड़ दो… जैसे हम लल्लन न हुए इनके नौकर हो गये, बे।”
“अरे भैया भाभी… मतलब भाभी से कैसे मिले….” चंदू ने फिर टोका ।

“ अबे अभी रख देंगे एक भन्नाटेदार, साला तुम सुन तो रहे नहीं हो, बोले अलग जा रहे हो… बताने दोगे तबही तो बतायेंगे” लल्लन भैया गुस्सा हो गये।

“अरे भैया, गुस्सा मत हो… यह लो एक और समोसा डकारो आप, लाल चटनी के साथ….”

“बस हम किसी तरह दुबाईन को स्प्लेंडर में बैठाकर उनके घर तक ले गये… और तो साला थैंक यू तक नहीं बोला हमको… लेकिन हम जैसे ही गाड़ी मोडें हैं, भाई बस उसी जगह काण्ड हो गया । गाड़ी अपने आप स्लिप मार गया.. और जैसे ही गिरे हैं समझों बस तबही हमारा दिल भी फुदक्के कहीं खो गया ।”

“मतलब भैया वो तो ठीक है, लेकिन भाभी की एंट्री कहा हुई अभी तक पिक्चर में…” चंदू से आखिर नहीं रहा गया और उसने पूछ ही लिया ।

“अरे अब होगी न, कभी कौनो फिलम में हिरोइन को पहले दिखाते हैं का…” लल्लन भैया समोसे को लाल चटनी में लपेटते हुए बोले, “हम गिरे और हम रोड पर.. हम नीचे और हमारी नज़रें ऊपर पर… और बस तबही हो गया नैन-मटक्का.. अबे पता है, प्राइमरी मास्टर दुबे की छत पे देखे हम उसको.. बिल्कुल हिरोइन की तरह गोरी, और स्मार्ट… कटरीना लग रही थी बे…”

“अरे भैया वो लड़की… ” चंदू ने लल्लन भैया को बीच में रोका ।
“काहे बे, तुम तो ऐसे कह रहे है हो जैसे तुम उसको जानते हो…” लल्लन ने चंदू से पुछा ।
“और का भैया…”
“तो बताओ न बे… जल्दी से…” लल्लन ने उत्सुकता से कहा ।

“मतलब भैया ऐसे ही थोड़े नहीं…” चंदू ने बोला ।
“हाँ ठीक है, समोसे का पैसा देदेंगे.. अब तो बको…” लल्लन ने बोला ।
“अरे वो तो अपने मास्टर की बेटी है, दिल्ली से डाक्टरी करके आई है ।” चंदू बोलते बोलते चुप हो गया ।

“और…” लल्लन ने पूछा ।
“और क्या भैया, बस इतना ही पता है, हमको भी…”
“अबे तो अब कैसे बनेगे हम दिलीप कुमार और वो हमारी मधुबाला….”

“अरे भैया, बस एक दिन के लिए अपनी स्प्लेंडर देदो, फिर देखो… पूरा बायोडाटा खटाखट पता करते हैं।” लल्लन ने मतलबी हसी हसते हुए कहा ।
“सही है बेटे, अब हमारी लकड़ी फसी है तो.. फ़ायदा लेलो, टाइम आने दो हम भी बतायेंगे तुमको…” लल्लन भैया ने चंदू को दप्काते हुए कहा, “ये लो गाड़ी की चाभी, और शाम तक सारा डिटेल बाहर, नहीं तो…..”

“अरे भैया हम समझ गये आप टेंशन न लो… आपका काम पैतीस मतलब सारा डिटेल यूँ…. बाहर समझो….” चंदू ने लल्लन भैया को सांत्वना चिपका दी।

चंदू को गए हुए तीन घंटे से ऊपर हो गया था, शाम ढलने को थी लेकिन अभी तक चंदू की कोई खबर नहीं थी.. वही दूसरी ओर लल्लन भैया का टहल टहल कर बुरा हाल हो गया था । खैर कुछ देर बार चंदू आ गया, और लल्लन को घसीट के दूकान के बाहर ले गया।

“भैया आप न रहने दो, ये लड़की वडकी का टनटा छोड़ो….”

“अबे हुआ का बे, मतलब ऐसा काहे बोल रहे हो बे, का उसका और कहीं लफड़ा चल रहा है? मतलब कौन है साला जो हमारे मोहल्ले की लड़की पे नज़र मार रहा है।” लल्लन भैया भड़कते हुए बोले ।

“अरे भैया ऐसा कुछ नहीं है, मैटर ये है कि आप हो बिल्कुल अंगूठा छाप, लोफ़र… आवारा किसम के….” चंदू आगे कुछ बोलता लल्लन में आव देखा न ताव चंदू के गालों में एक रैपटा रसीद दिया ।

“अरे भैया हमारा वो मतलब नहीं था… जाओ हम कुछ नहीं बताते…” चंदू किसी छोटे लौंडे की तरह बिलकते हुए बोला ।
“बको अभी तुरंत नहीं तो खाने भर का और देदेंगें तुमको…” लल्लन भैया गुस्से में लाल थे।

“भैया मतलब, आप काला अक्षर भैंस बराबर, और पिंकी….” चंदू ने गाल पे हाथ रखते हुए कहा लेकिन तभी लल्लन भैया पिंकी का नाम सुनते ही आहें भरने लगे ।

“भैया जी, बौराइए नहीं… सुन लीजिये… मतलब पिंकी पढ़ी लिखी डाक्टरी में ग्रेजुएट, यहीं अपने उर्षला में नर्स है… आपकी जोड़ी नहीं बनेगी….” चंदू ने लल्लन भैया को समझाते हुए बोला, “मतलब भैया बेकार में पंगे ले रहे हो, आपकी दाल नहीं गलेगी…”

लेकिन भैया पर चंदू की बातों का कोई असर नहीं हो रहा था, वो तो बस पिंकी का नाम रटे जा रहे थे, जैसे पिंकी का नाम न हो गया.. भगवान शिव का कोई मंतर हो गया हो ।

“ अबे हाँ, तो तुम का कह रहे थे… कि वो पढ़ी लिखी है और हम बैल…” लल्लन भैया थोड़ा चुप करके बोले, “ अबे मतलब अच्छा है न, वो नर्स है तो साला हम भी तो उसके प्यार के मरीज हैं । बिल्कुल वैसा ही करेंगे जैसे अपने शाहरुख़ की फिलम में वो एक तिसरका लौंडा किया था… अबे वही, जिसकी वाली एक अस्पताल में बच्चो के साथ खेलती थी…” लल्लन भैया की हालत कानपूर के उन दूसरे आशिकों की ही तरह हो गयी थी, जो किसी भी लड़की को देखते ही अपना दिल लुटा बैठते थे ।

अब आलम यह था कि लल्लन भैया दिन भर अपने एक तरफ़ा प्यार के कसीदे पढ़ते रहते और चंदू मस्त समोसे के चटखारे लेते हुए उन किस्सों का मजा लेता । अब तो लल्लन का ठिकाना उसकी दूकान से उठकर उर्सला के सामने चौराहे पे हो गया था । कुछ दिन बाद ऐसे ही चंदू ने लल्लन को टोकते हुए पूछा, “मतलब भैया, सिर्फ ऐसे ही एक बात बताइए…”

“का.. बको.. अब क्या फडफडा रहा है तुम्हारे भीतर…” लल्लन भैया बोले ।

“मतबल भैया यही कि आज चार दिन हो गये, आपको उर्सला जाते हुए… हमको तो कोई बात बनते दिख नहीं रही है और तो और ये कौन सा नौटंकी है कि आपको कुत्ता काट लिया है । पिछले चार दिन से आ रहे हैं, जा रहे हैं… बस सुई पे सुई ही लग रही है… फर्जी में पेट्रोल फूके जा रहे हैं गाड़ी का.. आप अपनी असली बीमारी कब बता रहे हो भाभी जी को…” चंदू ने आखिर पूछ ही लिया ।

“अबे तो उसके प्यार में कुत्ता ही तो गये हैं हम, देखे नहीं हो का… जब वो सामने होती है हमारे, खाली मुंडी हिलाते रह जाते हैं ।” लल्लन भैया शरमाते हुए बोले, “लेकिन अब नहीं, आज जब आखिर इंजेक्शन लगवाने जायेंगे, तो बस बक देंगे वही पर… अपने दिल का सारा हाल… हाय रे पिंकी… बस वो हमारे दिल के मर्ज़ का इलाज़ कर दे ।

लगभग दो घंटे बाद लल्लन भैया एक बार फिर पिंकी के सामने थे । लल्लन भैया कुछ बोलते उससे पहले पिंकी ने उनसे पूछ लिया, “क्या बात है लल्लन जी.. आज आने में लेट कैसे हो गये…”

“अरे वो कुछ नहीं, चंदू की बकवास में देर हो गयी, बहुत पकाता है यार….” लल्लन भैया ने पिंकी से नज़रें चुराते हुए कहा ।
“अरे कैसी बकवास, जरा हमे भी बताइए…” पिंकी ने इंजेक्शन में दवाई भरते हुए पूछा ।
“अरे कोई खास बात नहीं, बस ऐसे ही इधर उधर की….” लल्लन भैया ने सँभालते हुए जवाब दिया ।

“मतलब, नहीं बताना है तो मत बताइए, लेकिन ऐसे बहाना मत ही बनाइए…” पिंकी ने इंजेक्शन लगाते हुए थोड़ा नाराज़ होने के लहजे में कहा ।
“अरे मतलब का बताये… पिछले तीन से पूछ पूछ के परेशान कर रहा है कि हम आपको प्रपोस काहे नहीं कर रहे हैं और साला यहाँ हमको समझ नहीं आ रहा है कि आपको कैसे बताये कि बस हमको आपसे प्यार हो गया है… बिल्कुल सच्ची वाला जैसे अजय देवगन को हो जाता है, रवीना से…” लल्लन भैया को कुछ समझ नहीं आया कि कैसे क्या हुआ और वो जल्दबाजी में सब बोल गये ।

लल्लन की बात सुनते ही पिंकी ने अपना मुह घुमा लिया । लल्लन भैया एकदम से नर्वासये गये… पिंकी ने जब कुछ नहीं कहा तो लल्लन भैया ने हिचकते हुए कहा, “पिंकी जी ऐसा कुछ नहीं है, वो तो हम जल्दबाजी में सब बोल गये… हम चंदू को समझा देंगे आप टनसनाइयेगा नहीं ।” लल्लन ने अपनी सफाई पेस करते हुए पिंकी से कहा ।

“आज से यहाँ आने की जरुरत नहीं है, आपको सारे इंजेक्शन लग चुके हैं, अब आप जा सकते हैं…” पिंकी में गुस्से का बहाना करते हुए लल्लन को झाड़ते हुए, इतना ही नहीं जवाब देते वक़्त उसकी तरफ़ देखा भी नहीं ।

लल्लन भैया कोई जवाब नहीं दे पाए, बेचारे का दिल टूट गया था.. वो रोतडी सी शक्ल लेकर बहार जाने लगे कि तभी पिंकी ने पीछे से आवाज देते हुए कहा, “शाम को सर्सेया घाट किनारे मिले….”

ये सुनते ही लल्लन भैया की बाछे खिल गयीं, वो ख़ुशी से पगला गये । लल्लन भैया उर्षला से बाहर आ गये, उनको ख़ुशी से फुदकते हुए चंदू ने पूछा, “का हुआ भैया आज तो कुछ ज्यादा ही खुश लग रहे हैं?”

“अबे आज न तुम जितना चाहो उतना समोसा, जलेबी.. जो चाहो खा लो…” लल्लन ने चंदू को गले से लिपटाते हुए कहा, “अबे सामने से वो खुद्ही पूछी है… शाम को मिलने के लिए, वो भी गंगा किनारे….”

“मतलब भैया, मामला सेट समझो… लेकिन भैया इस बात पर तो जेड-स्क्वायर का पिज़्ज़ा तो बनता है न…” चंदू ने लल्लन भैया से खुश होते हुए कहा ।

“अबे तुम साले कुत्ता की पूछ हो, सुधरोगे नहीं… लेकिन चलो कोई न आज हम बहुत खुश हैं… चलो बे आज पिज़्ज़ा खिलाते हैं । वो का बोलते हैं अंग्रेजी में… लल्लन ऑन दा टॉप… अबे बिल्कुल सातवे आसमान पे… बिल्कुल ऐसा ही फील हो रहा है, हमको” लल्लन ने अपना दिल खोलते हुए चंदू से कहा ।

“भैया, साथ में कोल्डड्रिंक भी….” चंदू ने फिर से बोला ।
“हट, साला… सुधरोगे नहीं…” लल्लन भैया ने मजाक करते हुए कहा ।

अब आखिर क्या हुआ लल्लन की मोहब्बत का, यह आप सोचिये.. कमेंट करना न भूलियेगा.. आखिर आपके प्यार की जरूरत तो आपकी मिड नाईट डायरी को भी है ।

 

-अमन सिंह

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