Lag Ja Gale | Mid Night Diary | Aman Singh

लग जा गले | अमन सिंह | #बेनामख़त

तुमने जब भी मुझे गले लगाना चाहा है, मैंने तुम्हारी बाहों में खुद को सौपने से पहले अपने हाथ खोलकर तुम्हें अपने सीने में छुपा लिया। मैं ऐसा सिर्फ इसलिये ही नहीं करता कि तुम्हारे काँधे पर सर सकूँ या तुम्हारे माथे को चूम सकूँ। बल्कि ऐसा करने के पीछे की वजह कुछ और ही है।

शायद तुम्हारा मेरे सीने से लगकर खो जाना, इस पूरी दुनिया को भूल जाना बेहद आसान होगा। पर मेरे लिए किसी को गले लगाना जितना आसान है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है किसी के गले लगना।

हो सकता है, तुम्हारे लिए शायद किसी को गले लगाना और गले लगना दोनों ही बातें एक जैसी हो पर, दोनों में बिल्कुल वैसा ही फर्क है जैसा किसी से मोहब्बत करने और मोहब्बत पाने है। मैं जानता हूँ कि ये अच्छी बात नहीं, फिर भी कभी कभी मैं तुम्हारी बातों को नज़रअंदाज़ कर देता हूँ।

लेकिन चलो आज तुम्हें यह सच भी बता देता कि क्यों मेरे लिए किसी के गले लगना इतना मुश्किल है। सच तो यह है कि मैं बिखरना नहीं चाहता, खुद को बड़े ही जतन से, बहुत ही मुश्किलों से संभालकर रखा हुआ है।

लेकिन जिस रोज़ तुम्हारे सीने से लगूँगा, उस लम्हें में शायद मैं वो रेत हो जाऊंगा जिसे हम अपने हांथों से संभालना चाहते हैं लेकिन फिर भी वो बिखर ही जाती है।

मुझे डर इस बात का नहीं कि तुम मुझे सँभाल नहीं पाओगी लेकिन मैं डरता हूँ कि जिस रोज़ मैं बिखर जाऊँगा, क्या मैं तुम्हें सँभाल पाउँगा? डरता हूँ, कहीं ऐसा तो न हो कि मेरे अंदर के शांत समंदर का शैलाब जब इन आँखों से छलके, तो यह तुम्हें भी अपने साथ बहा ले जाये।

खुद के बिखरने का डर नहीं, तुम्हें खो देने का खौफ हैं जो मुझे तुमसे गले नहीं लगने देता। पर तुम सँभाल लोगी इसलिए अब बिखर जाना चाहता हूँ, बिल्कुल वैसे ही जैसे मोतियों को धागे का सहारा होता है।

 

-अमन सिंह 

 

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