Lafz Aur Dosti | Mid Night Diary | Maninder Singh

लफ्ज़ और दोस्ती | मनिंदर सिंह

सियाह रात की तनहाई में
अक्सर भटकते हुए लफ्ज़ मिल
जाते हैं

कुछ जाने पहचाने से
कुछ एक दम पराए

कुछ पुरानी दलीलों को
पुख्ता करते
कुछ नऐ अफ़सानों की बुनियाद
रख जाते हैं

कुछ घडी भर को बैठ जाते हैं
साथ
कुछ निगाहों से सलाम कर
गुज़र जाते हैं

कुछ भूली यादों का सिरा थमा
जाते
कुछ आने वाले वक़्त का एहसास
दिलाते हैं

कुछ सवाल बन कर खड़े हो जाते
हैं
कुछ पुराने सवालों का जवाब
ले आते हैं

कुछ शेर कुछ ग़ज़ल
कुछ नज़्म कुछ कहानियों में
ढल जाते हैं

कुछ ललकारते कुछ पुकारते
सियाह रात में रंग भर जाते
हैं

ना जाने दिन में कहाँ रहते
हैं सब
अक्सर यह दोस्त तन्हाई में
साथ निभाते हैं

 

-मनिंदर सिंह

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