Kyun Nahi | Mid Night Diary | Vaidehi

क्यों नहीं | वैदेही शर्मा

मैं वो क्यों नहीं हूं जो मुझे होना चाहिए,
मैं वो क्यों हूं जो मुझे नहीं होना चाहिए,
क्यों नहीं मैं दूध भरा गिलास फैला देता,
क्यों नहीं मैं स्याही हाथों पर लगा लेता,
बाल चेहरे पर बिखराए डरता क्यों हूं ,
कीचड़ और मिट्टी से भला बचता क्यों हूँ,

मैं रोऊँ चीखकर क्यों ना ऐसा होना चाहिए,
मैं वह क्यों नहीं हूं जो मुझे होना चाहिए।

कागजों की कविताएँ या,
कविताओं के कागज़,
मेरे होठों पर जमे क्यों हैं ?

संस्कार कहलाने वाले बेस्वाद निवाले मेरे मुँह ने ठुसे क्यों है?

कुछ मोटी किताबों के मोटे अक्षर ,
मेरी आंखों पर नजर के चश्मे से बैठे क्यों है ?

मैं वो क्यों नहीं हूँ जो मुझे होना चाहिए,
मैं वो क्यों हूँ जो मुझे नहीं होना चाहिए…!

 

– वैदेही

 

Vaidehi Sharma
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