Koi Apna Nhi | Mid Night Diary | Prashant Sharma | Sad Poetry

कोई अपना नहीं | प्रशान्त शर्मा | सैड पोएट्री

अब रातों को सो कर क्या करे हम।
मेरा तो अपना कोई सपना ही नही।

किसी का गम करे तो क्यों करे हम।
मेरा तो यहाँ कोई अपना ही नही।

भरी बज़्म को ही अपना मानते है।
मेरे सिवा क्यों कि मेरा कोई अपना नही।

हर किस्सा मेरी ही कहानी है यहाँ।
मेरा अपना कोई सिलसिला ही नही।

किसी से हाल भला क्यों पूछें हम।
मुझसे तो हाल मेरा कोई पूछता ही नही।

कोई ज़िक्र नही करता, कोई फ़िक्र नही करता।
खेर छोड़ो, इस बात का हमे भी कोई मलाल नही।

खुद ही खुद को बर्बाद करे जा रहे है हम।
कमाल ये है कि, फिर भी कोई गम ही नही।

हाल दूसरों का क्या जानू, किसी से अब क्या पूछे हम।
आलम ये है, हमे हमारी ही खबर नही।

खुदा तुझसे दुआ क्यों करे हम।
क़ुबूल तो दुआ तू एक भी करता नही।

और कितनी मिन्नतें अब और करे हम।
तू उस एक शख्स तक को मेरे नाम करता नही।

अब और आरज़ू किसी की क्यों रखे हम।
उम्मीद किसी के आने की में अब करता नही।

 

 

-प्रशांत शर्मा

 

Prashant Sharma
Prashant Sharma

766total visits,2visits today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: