किसकी नज़र लग गयी | अरविन्द सक्सेना

जाने किसकी हमें नज़र लग गयी
बद्दुआ किसकी आज असर कर गयी

छोटी छोटी सी बात गहरी होती गयी
होंठ सिलते गए आँखें रोती रहीं

मांगते भी तो क्या जवाब मांगते
खुद हमारी ही शायद नज़र लग गयी

जाने किसकी हमें नज़र लग गयी
बद्दुआ किसकी आज असर कर गयी

सामने ही हमारे आग लगती गयी
हम बुझाते रहे वो फैलती रही

ख्वाब भी जल गए दिल भी जल गया
और क्या अब कोई कसर रह गयी

जाने किसकी हमें नज़र लग गयी
बद्दुआ किसकी आज असर कर गयी

इतना कमजोर भी न था अपना प्यार
गलतफ़हमियों का बस हो गया शिकार

दूरियां बढ़ते बढ़ते दीवार हो गयीं
खुशियों की हमारी किसे खबर लग गयी

जाने किसकी हमें नज़र लग गयी
बद्दुआ किसकी आज असर कर गयी

 

-अरविंद सक्सेना

 

Arvind Saxena
Arvind Saxena

755total visits,2visits today

Leave a Reply