Kisi Ko To Shikayat Ho Rahi Hai | Mid Night Diary | Abhinav Saxena | Ghazal

Kisi Ko To Shikayat Ho Rahi Hai | Abhinav Saxena | Ghazal

मिरी खुद से अदावत हो रही है,
हमें ये किसकी आदत हो रही है।

हमीं से खुद नहीं मिल पा रहे
हम
किसी को तो शिकायत हो रही है।

यहां पेड़ों के साये हैं
बहुत से
तभी चलने में दिक्कत हो रही
है।

सभी लम्हों को जीते हैं यहां
पर
हमारी सिर्फ आफत हो रही है।

ज़माने से हमें लेना नहीं
कुछ
हमें हम से रफाकत हो रही है।

 

 

-अभिनव सक्सेना

 

Abhinav Saxena
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