Khel Jism Ka | Mid Night Diary | Hridesh Kumar | #UnlockTheEmotion

खेल जिस्म का | हृदेश कुमार | #अनलॉकदइमोशन

भागते भागते चबूतरे से नीचे उतर कर कुनाल ने हस्ते हुएे अपनी बड़ी बहन अंजली को पीछे देखा और अपने दोनो हाथो के अंगुठे को उसकी तरफ हिलाते हुये चिडाने लगा ,और बोला दीदी देखो मै ना अब आपसे बड़ा हो गया मै पुराने दो दिन से आपसे आगे निकलने लगा हूँ।

इतना कह कर वो थोड़ा मुस्कुराया और दौडते हुए वहां से चला गया। अंजली ने उसकी बातो को अनसुना किया और कमर पकड़ कर वही चबूतरे पर पैर लटका कर बैठ गई।

ऐसे कमर को पकड़ कर बैठी हुई देख बडी बहन ने उससे पूछा क्या हुआ ?
इतना सुनकर अंजली ने रोती हुई शक्ल बनाकर कराहते हुए कहां – दर्द हो रहा है दीदी।

इससें पहले कि अंजली कुछ और कहती उम्र को ध्यान मे रखते हुए दीदी बोली – तो जा अन्दर मेरी अलमारी मे एक नया पैकट रखा है जाकर लगा ले! और वहां से चली गई।अंजली के आंशू मानो अपने आप ही रूक गये थे और गुस्से भरी निगाहों से पीछे से दीदी को जाते हुए देखने लगी,बात मासिक धर्म यानी पीरियड्स कि थी ,दीदी का बताना उसे समझा पर अंजली के पीरियड्स अभी 3दिन पहले ही खत्म हुए थे फिर उसकी दशा देख कर कुछ भी अनुमान लगाना उसे उसकी तकलीफ और बडा रहा था।

हालांकि अभी दर्द थोड़ा कम हो गया था और अंजली अपने कमरे मे जाकर अपने बैड पर तकीये को दोनों पैरो को बीच मे दबा कर सो गई।

करीब 40 मिनट ही हुये होंगे कि उसके हौंठो पर कुछ रगडता हुआ जैसा एहसास हुआ, उसने कच्ची नींद की आखो को जैसे ही जरा सा खोला और सामने का दृश्य देखते ही उसकी आंखें पहले से 10 गुना ज्यादा खुल गई. और आंखों को खुला देख उसके मुंह पर हाथ रखते हुए आबाज आई चुपचाप लेटी रहो वर्ना रात बाली बात सबको बता दूंगा,इतना कहकर हाथ मूंह से हटाकर अंजली के पूरे शरीर पर चलाने लगा,तभी अंजली ने रोते हुए बस इतना कहा कि मामा मुझे जाने दो कल का बहुत दर्द हो रहा है, मामा अब उसके कपड़ों को हटा कर बोला अरे पगली बस कुछ देर कि ही तो बात है और अपनी हवस से अंजली के शरीर को गोश समझकर नौंचता रहा।

ये अंजली के साथ पुराने दो दिन से हो रहा था उसके मामा पास के शहर मे ही जमीन का लेनदेन जैसा कोई व्यापार करते है और इस बारे मे मम्मी को भी पता था पर जब खुद अंजली ने जाकर मम्मी को सब बताया तब वो रोते हुईं बोली कि मै क्या करू ,जब तुम्हारे पापा का दिल का आपरेशन हुआ था तब इन्हीं ने पैसो कि मदद कि थी और पैसे चुकाना हमारी औकात से बाहर है इस वक्त वो रोते हुए इतना समझ चुकी थी कि यहां मजबूरी मे उसके परिवार ने 17 साल की अपनी खुद कि बेटी को बेंच डाला।और जब खेलते वक्त उसने ये सब अपनी दीदी को बताना चाहा तब भी उसे नही सुना गया ।

ये सब सोच सोच उसकी आंखों के दोनों तरफ गर्म आसूओ का शैलाब सा निकलता दिख रहा था और मामा अपनी भूंख मिटा ने मे लगा था। ये भयंकर मंजर यूहि चलता रहा और मामा अपने कारनामे को अंजाम देकर वहा से चला गया। 

अंजली के पास अब उसके हिसाब से सिर्फ एक ही रास्ता था, और वो था आत्महत्या करने का पर इतनी छोटी उम्र मे आत्महत्या करने कि हिम्मत जुटाना आसान नही था, बहुत सोचा और आखिरकार उसने अपने ही छत से नीचेे कूदने के लिए वहां पहुंची, डर के मारे पसीने से पूरा चेहरा गीला हो चुका था,गले का पानी सूख चुका था।

अंजली कदम बढाते हुए किनारे पहुंची और नीचे नजर जाते ही कांपने लगी। इतने मे जोर की आबाज उसके कानो तब पहुंची- ऐ लडकी पागल है क्या, आबाज सुनते ही नजर इधरउधर घुमाई तो देखा सामने छत् पर एक लडका था जो शायद सामने बाले के यहां रिश्ते दार था वो इसलिए क्योंकि इससे पहले कभी उसे देखा नही था अंजली ने,देखने मे हस्टपुस्ट था शरीर से, आज अचानक अंजली की सांसो मे तेजी थी उसे पलभर मे सब कुछ नया और अच्छा लगने लगा।

शायद ये अजीब था पर हो सकता है ये मुहब्बत थी.. बिना किसी के कहे अब अंजली को जीने कि वजह मिल गई थी और बो उस अन्जान चेहरे को देख मुस्कुराई और शर्मा कर नीचे चली गई। और कुछ दिनो मे उसके मामा भी अपने घर चले गये, अंजली को अब सब ठीक होता नजर आ रहा था और इसकी वजह उसे वही अंजान चेहरा समझ रही थी।

मुहब्बत फिलहाल तो एक तरफा थी जो सिर्फ अंजली की आंखों मे थी और सामने के घर पर निगाहें हमेशा उस चेहरे को डूंडती रहती । सब सही चल रहा था और यहां सालो बाद दीदी के ससुराल से दीदी के पति भी उन्हें लेने आ गये जिन्हे देख पूरे परिवार मे खुशी का माहौल था।

आज अंजली से उसने खुद बात की और अपना नाम कमल बताते हुए दोस्ती का प्रस्ताव रखा। अंजली से उसने फोन न. लेते हुए अलबिदा किया। आज तो अंजली मन ही मन खिल रही थी जिसकी चमक उसके चेहरे पर एक दम नजर आ रही थी।

2-4दिन निकले ही थे कि यहां जीजा जी के अश्लील मजाक सुनना जैसे आम हो गया था।पूरे दिन की कहानी अब वो कोमल से फोन पर बात करते हुए बता दिया करती थी पर दिन पे दिन जीजा जी कि अश्लील बाते अब अश्लील हरकतों मे बदलने लगी और वहा जब वो कमल को बताती तो झगडा होता ।

और एक दिन वही हुआ जिसका डर था घर पर अकेला पाकर अंजली की आबरु को लूट कर उसका जीजा अपने मंसूबे पूरे कर चुका था।अंजली ने रोते हुए जब ये बात अपनी दीदी को बताई तो उसके पैरों के नीचे से जैसे जमीन गायब हो गई और रोते हुए नीचे बैठ गई।

नीचे बैठे बैठे हाथ जोडकर अंजली से बोली जो कुछ हुआ है वो किसी को मत बताना वर्ना घर मे बडा बबाल होगा और सालो बाद ससुराल से वो लेने आऐ है मुझे ,ऐसा हुआ तो वो रिश्ता खत्म कर देंगें। मै तेरे पैर पडती हूं अपनी बहन के लिए मांफ करदे,अंजली भी रोते हुए वही बैठ गई और गले लगकर रोने लगी। कुछ दिन तक तो अंजली ने किसी को कुछ नही बताया पर अब शरीर से ज्यादा चोट उसकी रूह पर पहुंची थी और उस पर रहा नही गया।

कमल से रोज की तरह आज भी बात हुई पर आज उससे रहा नही गया और सब बता दिया.. कमल ने पहले उसे बहुत सुनाया और फिर रोने लगा आज फोन पर सिर्फ दोंनो की सिसकियाँ बात कर रही थी और कमल ने अंजली को भरोसा दिलाते हुये कहा कि वो जल्द ही उसे यहाँ से दूर ले जायेगा और दोनों मिलकर एक नई दुनिया बसायेगे।

आज अरसे बात अंजली को राहत आई और कमल के मूहँ से फिक्र की बात सुनकर अच्छे से सोई। पहले की तरह ही दिन निकलने लगे पर जब कभी भी अंजली को पुरानी बाते याद आती उसके रोंम रोंम कांप जाते उसे तरस आता अपने ऊपर खुद को कोसती और तकिये को दोनों पैर के बीच मे रखकर सो जाती।

सुबह उठी और मोबाइल देखा तो उसमे कमल का मैसेज था जिसमें जगह के साथ टाइम लिखा था और लिखा था अपना सामान साथ लेकर आना। मैसेज पडते ही अंजली. खुशी से उछल पडी ,रात के करीब 1बजे दोनों स्टेशन पहुंचे ट्रेन सुबह के 7बजे थी तो दोनों ने वहां पास मे ही एक होटल मे एक कमरा लेना सही समझा । कमरा एक था मस्ती की बाते कि पर वक्त काफी था तो हाथो का स्पर्श कब जिस्म से रूह तक पहुंचा पता ही नही चला।

दोनों के जिस्म पसीने मे सने हुए थे,और कब सो गये पता ही नही चला। सुबह करीब 8बजे अंजली की आंख खुली और वो शायद लेट हो चुकी है ये सोचकर उठी और कमल को डूडने लगी पास मे टेबल पर एक खत पडा था जिसमें लिखा था।

धन्यवाद इतने सारे पैसे और जेबर साथ लाने के लिये मै अपनी गर्लफ्रैंड के साथ जा रहा हूँ अपना खयाल रखना। आज अंजली को इस वक्त कुछ नजर नही आ रहा था और उसी होटल की खिड़की से कूद कर उसने आत्महत्या करली।

उसी दिन कमल और अंजली के साथ मे गायब होने के शक मे पुलिस ने तहकीकात के लिये अंजली के शरीर को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया जिसमें उसके साथ बलात्कार कि पुष्टि हुईं पर कमल के घर वालो के दवाब मे एक बार फिरसे पोस्टमार्टम हुआ। और कुछ दिनो बाद सब रफादफा हो गया।

आज अगर अंजली ऊपर से देख रही होगी तो रोते हुये सिर्फ यही सोच रही होंगी कि उसके जीते जी उसके शरीर को हबस को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया और मरने के बाद भी शरीर कि बोटी बोटी को इंच इंच नापा और अपनी आग बुजाई।
20साल बाद कमल के बेटे ने अंजली के मामा की बेटी के साथ दोस्ती करके मोबाइल न. भी ले लिए एक दूसरे के…

-हृदेश कुमार

 

Hridesh Kumar
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2 thoughts on “खेल जिस्म का | हृदेश कुमार | #अनलॉकदइमोशन

  1. उसकी चीख ना ही कल किसी ने सुनी थी ,
    और ना ही आज किसी ने सुनी !
    वो कल भी रो रही थी ,
    और वो आज भी रो रही है !
    उसकी पलके नम तो है
    पर आंसू टपकने की आवाज आज भी किसी के कानों तक नही पहुंची।
    इस भीड की दुनिया मे वो कल भी अकेली थी और आज भी अकेली है।

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