कठोर हृदय | अमिता गौतम | #अनलॉकदइमोशन

 

कठोर हृदय कर, निकल पड़ा कुछ करने को,
इस बुराई को कम करने, दुनिया को बदलने को,

खुद को कष्ट दिया, यातनाएं दी,
उस पगली को भी बहुत सी संभावनाएं दी,
अब खड़ा हूँ,नहीं कोई साथ चलने को,
कठोर हृदय कर, निकल पड़ा कुछ करने को,

उसको रोता देख मेने खुद को सख्त किया,
ये जो फैसला था मेने उसी वक़्त किया,
कदम बढ़ाया मेने पीछे न पलटने को,
कठोर हृदय कर, निकल पड़ा कुछ करने को,

उसका जुनून था मैं, की प्यार था,
उसको अब भी मेरा इंतज़ार था,
वही जो तैयार थी साथ जीने और मरने को,
कठोर हृदय कर,निकल पड़ा कुछ करने को,

जब वाकिफ़ हुए खुद से तब,
दूर हो गए मुझसे अपने सब,
कुछ खास नहीं बचा, सिवाए हाथ मलने को,
कठोर हृदय कर, निकल पड़ा कुछ कारने को।

 

 

-अमिता गौतम 

 

Amita Gautam
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