Kar Liye Jaaye | Mid Night Diary | Arvindra Rahul

कर लिए जाये | अरविन्द्र राहुल

डर का अंजाम भुगतने से अच्छा क्या है
उसका सामना कर लिए जाये।

यूँ रोज रोज मरने से अच्छा क्या है।
मौत को ही जिंदगी का मायना कर लिए जाये।

मंजिल को पाकर भी खुश नहीं हुए।
क्यों ना रास्तों पर ही बिछौना कर लिए जाये।

सुबह की हवा में अब बो ताजगी नहीं।
रात मैं ही इन साँसों को रूहाना कर लिया जाये।

गति के इस युग में रिश्तों की चाल धीमी पढ़ गयीं।
चलो आज अपने पडोसी के साथ रात का खाना कर लिए जाये।

शिकायत तो सभी को है इस दौर मैं।
क्यों का सुलह का एक पंचनामा कर लिए जाये।

देखो तो आज भी सूरज निकला हे राहुल।
कोशिश का एक और बहाना कर लिए जाये।

 

-अरविन्द्र राहुल 

 

Arvindra Rahul
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