Kanha Tune Preet Sikhai | Mid Night Diary | Anupama verma

कान्हा तूने प्रीत सिखाई | अनुपमा वर्मा

नीरस लगता था हर एक क्षण
नाउम्मीद था हर एक कल
शून्य था मै स्वयं मे अब तक
तूने पूर्णता की ज्योत जगाई
मन को मेरे दिशा दिखाई
कान्हा तूने प्रीत सिखाई

जग की रोशनी से भ्रमित
हर चाहत थी अतृप्त
भटक रहे थे मंदिर मस्जिद
गहरी थी माया की खाई
मन को मेरे दिशा दिखाई
कान्हा तूने प्रीत सिखाई

व्यापार के कुछ मंत्र
सीख लिए लोगो से तंत्र
प्रेम के बाजार मे हम
भावो के बन बैठे सौदाई
मन को मेरे दिशा दिखाई
कान्हा तूने प्रीत सिखाई

धूल चढी थी आँखो पर
बेरंग लगता था हर रंग
भूलकर बैठे थे सत्कर्म
अधिकारो की राह के राही
मन को मेरे दिशा दिखाई
कान्हा तूने प्रीत सिखाई

 

-अनुपमा वर्मा

 

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