कलम | अभिषेक यादव

मैं लिख रहा हूँ,
क्या लिख रहा हूँ, नहीं पता।

क्यूँ लिख रहा हूँ ,नहीं पता,
कागज पर, कॉपी पर या दीवारों पर लिख रहा हूँ, नहीं पता।

कहाँ लिख रहा हूँ ,नहीं पता,
मैं सिर्फ लिख रहा हूँ।

मैं अंतिम पंक्ति की तलाश में लिख रहा हूँ,
लिखता ही जा रहा हूँ।

अंतहीन होने पर पता चला
मैं तो “कलम” की परिभाषा लिख रहा हूँ।

 

-अभिषेक यादव 

 

Abhishek yadav
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