Kabhi Yun Bhi Mil | Mid Night Diary | Saransh Shrivastva

कभी यूँ भी मिल | सारांश श्रीवास्तव

कभी तो यूँ भी मिल,
कि तू खफा न लगे..

मुझसा मैं न लगूं
तुझसा तू भी न लगे..

अब न वो असर है,
और न ही वो बात,
किसी की दुआ भी,
अब दुआ न लगे..

ये किस कश-म-कश में,
छोड़ा है ऐ जिंदगी तूने,
कि सामने रहे खुदा
और खुदा न लगे…

एक अरसा गुज़ार चुका,
तलाश ही तलाश में,
अब मुहब्बत में किसी की,
वफ़ा न लगे…

रंग दिया कोरे वर्क को,
तेरे ही नाम से,
पढना तन्हाई में ये ख़त
कि हवाओं को भी पता न लगे…

परे रखते है तमाम रिवायतें अब
लम्हा लम्हा तेरे बिना अब अधूरा सा लगे….

 

-सारांश

 

Saransh Shrivastava
Saransh Shrivastava

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4 thoughts on “कभी यूँ भी मिल | सारांश श्रीवास्तव

  1. हर बार आप अलग अंदाज के साथ आते हैं, सारांश बहुत बहुत शुभकामनाएं। बेहद सुन्दर रचना

    1. तेहदिल से शुक्रिया सर , आपके पढ़ने का अंदाज़ अलग होगा बाकि यूँ तो कुछ ख़ास नहीं । यूं ही स्नेह बनाये रखिये,एवं मार्गदर्शित करते रहिए।पुनः दिल से धन्यवाद ।

    1. मेरे हर राज़ से तो वाकिफ है आप,
      बहरहाल दिल से शुक्रिया।☺☺

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