Kabhi | Mid Night Diary | Mrinal Mandal

कभी | मृणाल मंडल

बेअसर हो गयी दवाएं इस जहाँ में,
तुम लबों से ज़हर चखाना तो कभी।

ये ज़मीं ढूंढती रहती है जिसका पता,
उस आसमाँ का पता बताना तो कभी।

यहाँ जल रहा हैं समंदर हर रोज़ कोई,
रेगिस्ताँ को दरिया बनाना तो कभी।

क्या काफी है कहना कि सांसे बाकी है?
हुनरमंदी जीने की सिखाना तो कभी।

कोई सयाना ढूंढ़ रहा राम हर दरगाह में,
तालीम-ए-इश्क़ मुझे दिलाना तो कभी।

जो कभी ‘गुलज़ार’ था, ‘जौन’ हो गया है,
‘मृणाल’ हसरते अपनी समझाना तो कभी।

 

-मृणाल मंडल

 

Mrinal Mandal
Mrinal Mandal

4062total visits,2visits today

Leave a Reply