Jab Kaha Tha | Mid Night Diary | Deepti Pathak | #UnlockTheEmotion

जब कहा था | दीप्ति पाठक | #अनलॉकदइमोशन

वो जब कहा था तुमने कि वक़्त के साथ हर किरदार बदलेगा,

मैं भी बदलूंगा ,कुछ तुम भी बदल जाना,

पर क्यों नही बताया था तुमने के किरदार के साथ मेरा हकदार भी बदलेगा,

तुम भी बदल गए, और जैसा कि तुमने कहा था

मैंने खुद को भी बदला है,पर ये हक़ कैसे किसी और को देदूँ ,

ये हक़ तो सिर्फ तुम्हारा था,

मेरे माथे पर बेमतलब ही आये उन ज़ुल्फ़ों को हटाने का हक़,
मेरी आंखों में काजल फैलाने का हक़,

मेरे गले में अपनी बाहों को उलझाने का हक़,
मेरी गोद में सर रख सो जाने का हक़,

मेरी शरारतों पर नाराज़ होने और मेरी उदासी में मुझे हसाने का हक़,
मेरे उड़ते हुए आँचल की छांव में आने का हक़,

मेरी पायल की आवाज़ पर मुस्कुराने का हक़,
मेरी हंसी को निहारते जाने का हक़।

और मेरी धड़कनो को बेचैन करती हर आहट में सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे होने का हक़,
ये हक़ मैं कैसे किसी और को देदूँ।

ये तो तुमने बताया ही नही,
वो जब बताया था तुमने की मेरा हकदार बदलेगा तुमने जो किया था मुझसे वो प्यार बदल बदलेगा ।

( इश्क़ में हक़ कैसा,जो हक़ ही नही तो इश्क़ कैसा)

 

 

-दीप्ति पाठक 

 

Deepti Pathak
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7 thoughts on “जब कहा था | दीप्ति पाठक | #अनलॉकदइमोशन

  1. मेरी पायल की आवाज़ पर मुस्कुराने का हक़,
    मेरी हंसी को निहारते जाने का हक़।
    …chaahmebaddur ..keep going …dhyaan rkhna kahin siyaahi khatam na hone paae

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