Itna Mushkil Bhi Nahi Hai | Mid Night Diary | Anupama Verma

इतना मुश्किल भी नहीं है | अनुपमा वर्मा

बहोत आसान है
जो हम अकसर करते है
लेकिन
मैने करके देखा है
हाँ.. वो जो हम अकसर नही करते है
और यकीं करो दोस्तो
इतना मुश्किल भी नहीं है

हाँ.. बहोत आसान है
बाहर से थककर घर आना
आते ही माँ के सामने फरमाईशो का बैग खोल देना
कुछ इस अंदाज मे
कि जैसे माँ ने पूरा दिन आराम ही किया होगा

लेकिन
मैने करके देखा है
हाँ.. वो जो हम अकसर नही करते है
बाहर से आकर थकान को अनदेखा कर
अपने और माँ के लिए कडक चाय बना लेना
और फिर साथ बैठकर चुस्की लेते हुए
पूरे दिन का हाल सुना देना
यकीं करो दोस्तो
इतना मुश्किल भी नही है

हाँ.. बहोत आसान है
हर महीने की पहली तारीख को
कभी साइकिल तो कभी विडीयो गेम के लिए
बाबा से बजट बनवा लेना
और बाबा का हमारा उदास चेहरा देखकर
“ना कहने के विचार”को कही दूर फेंक देना

लेकिन
मैने करके देखा है
हाँ.. वो जो हम अकसर नही करते है
हाँ.. मैने बाबा से पूछा है
क्या आपके बाबा भी हर बार बजट बना दिया करते थे
या बाकी है कोई ख्वाब
जो आप अपने लिए देखा करते थे
यकीं करो दोस्तो
इतना मुश्किल भी नही है

हाँ.. बहोत आसान है
किसी दोस्त की गलती पर
उससे नाराज होकर बोलना बंद कर देना
कुछ दूसरो दोस्तो के साथ बैठकर
बस यूँ ही उसे नजरअंदाज कर देना

लेकिन
मैने करके देखा है
हाँ.. वो जो हम अकसर नही करते है
दोस्त की गलती को नदी मे बहाकर
किनारे पर ही उससे पहले जैसे मिल लेना
और उसके साथ फिर से ऐसे जीना
कि गलतियो के लिए बचे ही ना कोई नौका
यकीं करो दोस्तो
इतना मुश्किल भी नही है

 

-Anupama Verma

 

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