Intzaar Us Pal Ka | Mid Night Diary | Upasana Pandey

इंतजार उस पल का | उपासना पाण्डेय

मेरी डायरी का पन्ने का हिस्सा-‘इंतजार’
तुम जब भी रूठने की कोशिश करते हो मैं तुम्हे
आवाज देती हूँ,

‘राजीव’ सुनो न जब भी उससे ऐसे बोलती हूँ तो,

वो पलटकर मुस्कुरा देता है जैसे पागल हूँ मैं यही बोलना चाहता हो मुझसे,
अक्सर सबकी नज़रो से बचकर बहुत देर तक तुम्हे देखना चाहती हूँ मै,
मगर कमबख्त जमाना और मेरे घरवाले मुझे ताकते हुए देख न ले तो बस इसलिये नज़रे छुपा लेती हूँ,

सब कहते कि दूरियां प्यार को कम कर देती है मगर हमे मिले तो 2 साल 3 महीने हो गए मगर प्यार जस का तस है,

‘तुम जब प्यार से हम्म बोलते हो न तो न जाने क्यूँ तुम्हारी आवाज में खुद के लिए बेइंतहा मोहब्बत देखती हूँ,
हाँ मुझे तुमसे प्यार है बहुत,

“मुझे घुटन सी होती है कि कही तुम्हारे आने तक ये सांसे थम न जाये,
ये चांद की रोशनी और टिमटिमाते तारे गवाह है मेरी सिसकियों के,
पता है दिल तुमसे कभी खफा नही होगा और तुम
बिजी होते हो फिर भी मेरे लिए अपना कीमती वक़्त निकालते हो,

‘तुमने बोला था एक रोज की तुम मुझसे प्यार नही करते’

सच ही तो बोला था क्योंकि तुम तो चाहते हो मुझे,
मुझे कही दूर ले चलो जहां सिर्फ ‘राज की उपासना हो’

‘और ये तारे भी ये चाँद भी जब भी ये साथ होंगे प्यार और भी गहरा होता जायेगा,
बस जल्दी आ जाओ मैं एक प्यासी नदी सी हूँ,
और तुम प्यार का सागर हो,

पता है दिल घबरा जाता है एक रोज जब एक बुरा ख्वाब देखा था,
तुम्हारी आगोश में एक अनजान अक्स दिखा,
उस रात घंटो रोई थी,
मगर फिर दिल की धड़कनों में एहसास हुआ कि तुम पास हो मेरे,तुम विश्वास हो तुम वो नही जो मुझे और दिल को टूटने दोगे, तुम वो हो ही नही जो मुझे रोने दोगे,
मेरे एक आंसू गिरने से जब तुम्हे दर्द होता है, तो भला मुझे क्यूँ रुलाओगे तुम,
मुझे उस रात का इंतजार है जब हल्की सी ठंडी हवा का झोंका और तुम्हारी आगोश में छुपी होगी एक पागल सी लड़की!!!!!

कब खत्म होगा ये’ इंतजार’ इंतजार…..
अधूरी सी इच्छा’ आकांक्षा

 

 

-उपासना पाण्डेय

 

Upasana Pandey
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