Intzaar Aur Bebasi | Mid Night Diary | Shweta

इंतज़ार और बेबसी | श्वेता

ये कहानी आपको 10 साल के पीछे के दौर और एक छोटे शहर में ले जाएगी। एक ऐसा शहर जहां मां बाप लड़कियों को पढ़ाते जरूर थे लेकिन शायद ही किसी लड़की को इंग्लिश मीडियम से पढ़ाया जाए।

एक 14 साल के लड़के का एडमिशन शहर के एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में क्लास 9th में कराया जाता है। प्रशांत पढ़ने में काफी अच्छा था और शायद यही वजह थी कि उसने पहले दिन ही काफी दोस्त बना लिए थे। पूरा मन लगाकर टीचर की बातों पर ध्यान दे रहा था ऐसे चार पीरियड निकल गए और फिर इंटरवल की घंटी बज गई। टीचर जा चुके थे और बच्चों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया था। प्रशांत तो बहुत शर्मीला था। उसने अभी तक क्लास के उस तरफ नहीं देखा था जिधर लड़कियां बैठा करती थी।

लेकिन इंटरवल के शोर-शराबे के बीच एक लड़की की हंसने की आवाज़ उसे बहुत आकर्षित कर रही थी। आवाज से बहुत खुश मिजाज लग रही थी वो लड़की। उसने अभी एक नए बने दोस्त को बुलाने के लिए पीछे मुड़ने के बहाने से उस लड़की को देखा। और तभी अचानक से उस लड़की की नजर भी प्रशांत से टकरा गई। प्रशांत झट से दूसरी तरफ मुड़ गया। क्लास में लड़कियां बहुत कम थी और उन सब में से सबसे सुंदर वही लड़की थी। प्रशांत ने अपने दोस्त से उस लड़की के बारे में पूछा।

‘अरे सुन भाई वो कौन लड़की है’……..प्रशांत बोला।
‘कौन वो!’……..दोस्त बोला। ‘हां वही’
‘वो कविता है, यहां के प्रिंसपल की बेटी’

स्कूल में प्रशांत को 2 महीने हो चुके थे और क्लास में सब को यह खबर हो चली थी की प्रशांत कविता को पसंद करता है और कविता को भी इस बात का पता चल चुका था। जब भी कविता का नाम अटेंडेंस के लिए लिया जाता था तो सभी लड़के प्रशांत को देखने लगते थे जिससे प्रशांत बहुत गुस्सा जाता था। प्रशांत तो पहले से ही शर्मीला था ऊपर से ये कविता भी प्रिंसिपल की बेटी थी इस बात से प्रशांत परेशान रहता था। शायद यही वजह थी कि प्रशांत ने अभी तक उससे बात करने की कोशिश नहीं की थी।

एक दिन जब कविता अपने घर में थी तभी उसके घर का टेलीफोन बजता है और उसके पापा फोन उठाते हैं।
“हेलो! मैं प्रशांत बोल रहा हूं कविता से बात हो जाएगी क्या”

“क्यों कविता से क्या बात करनी है, मुझे बताओ मैं उसे बोल दूंगा”….पापा अपनी आवाज़ में थोड़ा जोर देते हुए बोले।
और अपने आप को प्रशांत बोलने वाले लड़के ने फोन काट दिया।

पापा ने कविता को बहुत ही गुस्से से बुलाया और पूछा, “ये प्रशांत कौन है”

“मेरे क्लास में पढ़ता है पापा”….कविता ने डरते हुए कहा। कविता उस दिन बहुत डाटी गई।

अगले दिन प्रशांत को प्रिंसिपल ने अपने ऑफिस में बुलाया और फोन कॉल के बारे में पूछने लगे
“कल तुमने कॉल क्यूं काट दी थी”

प्रशांत बिल्कुल शांत खड़ा रहा थोड़ा आश्चर्य में थोड़ा डर में क्यूंकि उसे नहीं पता था कि सर क्या बोल रहे है।
“सर! कौन सी कॉल”

“तुमने ही तो कल कॉल की थी कविता से बात करने के लिए” प्रिंसिपल ने आवाज़ ऊंची करते हुए कहा.
“सर मैने कोई कॉल नहीं की”

“ये आखिरी वार्निंग है, अगर दोबारा हुआ ऐसा तो स्कूल से निकाल दूंगा” प्रिंसिपल ने प्रशांत की कोई बात नहीं सुनी और उसे क्लास में जाने को बोल दिया।

क्लास के ही एक लड़के ने प्रशांत का नाम बताकर कविता के घर फोन किया था। प्रशांत ने कविता से कई बार बताने की कोशिश की कि उसने कोई कॉल नहीं की है लेकिन कविता उससे बहुत चिढ़ गई थी और उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं थी।

दो साल उन दोनों ने बात नहीं की। कविता के पापा ने प्रशांत का सेक्शन भी बदल दिया था ताकि उन दोनों की बात ना हो सके। उन दोनों ने दसवीं के एग्जाम पास कर लिए थे। क्योंकि वह स्कूल से 10th तक ही था तो उन दोनों ने दूसरे दूसरे स्कूलों में एडमिशन ले लिया।

लेकिन चाहे भगवान की मर्जी कहा जाए या सिर्फ एक इत्तफाक उन दोनों ने एक ही कोचिंग में नाम लिखवा लिया। यहां भी प्रशांत में कविता से कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन कविता ने कभी भी ध्यान नहीं दिया। अब प्रशांत ने कविता से बात करने की कोशिश करना भी बंद कर दिया था।

उन दोनों ने 12th के एग्जाम भी पास कर लिए थे और प्रशांत हायर एजुकेशन के लिए दूसरे शहर चला गया था। प्रशांत वहां बहुत सी लड़कियों से मिला लेकिन पहला प्यार भुलाया नहीं जा सकता था उसे अभी भी कविता ही पसंद थी। उसकी आगे की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी थी और उसे बहुत ही जानी मानी कंपनी में नौकरी मिल गई थी लेकिन यह एक सच्चा प्यार ही था जो उसे कविता को भूलने नहीं दे रहा था।

एक दिन प्रशांत ने सोशल साइट की मदद लेने की सोची। उसने सोशल साइट खोली और “कविता त्रिपाठी” सर्च किया। इस नाम से बहुत से लोग उसे दिखे। प्रशांत एक एक करके सब की प्रोफाइल देखने लगा कुछ देर बाद उसे वो मिल गया जिसकी उसे तलाश थी। उसने तुरंत ही उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। 2 दिन बाद उसकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली गई थी उसे यकीन नहीं हुआ कि कविता ने ऐसा किया। उसने मैसेज में “हेलो कविता मुझे पहचाना” लिख कर भेजा।

कविता ने रात में प्रशांत का मैसेज देखा उसे देख कर बहुत आश्चर्य हुआ कि कैसे एक इंसान किसी को इतने दिन तक बिना मिले और बात करें याद रख सकता है। उसने भी उसके मैसेज का रिप्लाई किया “हेलो, हां मैं पहचान गई तभी तो रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की”। बातों का सिलसिला शुरु हो चुका था प्रशांत ने सब कुछ उसे बताया कि क्लास 9th में उसने कॉल नहीं की थी और वह ये बात उसको बताना चाहता था लेकिन उसने कभी ध्यान ही नहीं दिया और उसने यह भी बताया कि उससे बात भले ही ना होती हो लेकिन उसके बारे में सब पता कर रखा है कि वो क्या कर रही है, कहां है।

कविता प्रशांत की ये बात सुनकर बहुत आश्चर्य मे थी। कविता को विश्वाश नहीं हो रहा था कि प्रशांत उससे पिछले 10 सालों बात करना चाहता था।

प्रशांत आज बहुत खुश था उसको विश्वास था कि कभी न कभी कविता की उससे बात ज़रूर होगी और आज 10 साल बाद उसके विश्वास की जीत हुई थी उधर कविता अपने बिस्तर पर लेटी हुई सोच रही थी कि कैसे कोई इतना इंतजार बिना किसी स्वार्थ के कर सकता है। खुशी और आश्चर्य की मिला जुला एहसास उसे एक अलग ही अनुभूति करा रहा था।

कविता के दिमाग और दिल में एक लड़ाई चल रही थी। दिमाग कहता था की उसे आजतक कोई अच्छा इंसान नहीं मिला है और समाज से अयी हुई खबरें भी उसे यही सीख देती थी लेकिन दिल कहता था कि जो लड़का 10 साल इंतजार कर सकता है वो बाकी लड़को जैसा नहीं हो सकता। रात भर करवटें बदलती कविता सो नहीं सकी और सुबह होते होते उसका दिमाग ये लड़ाई जीत चुका था। आज सिर्फ उसका दिमाग ही नहीं जीता था समाज की कुरीतियां और दकियानूसी सोच भी जीत गई थी।

सुबह होते ही प्रशांत ने कविता को गुडमॉर्निंग का मैसेज करने के लिए सोशल साइट खोली, सामने लिखा था “you can’t reply to this conversation” कविता ने उसे ब्लॉक कर दिया था।

 

-श्वेता

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