Hey Chandramukhi | Mid Night Diary | Rahul Vyas

हे! चंद्रमुखी | राहुल व्यास

हे!चंद्रमुखी हे! मृग नयनी ये कंचन सी जो काया है
हे प्रिये सुमुखि ये बतला दो ये रूप कहाँ से पाया है
ये अधरों में मुस्कान सजी
या नयनों की हो चंचलता
या मुड़ी मुड़ी सी भृकुटि हो
या कोमल तन की कोमलता
ये लम्बे काले केश तेरे जैसे मेघों का साया है
हे प्रिये सुमुखि ये…….

हे!कलावती हे रूप वती
है रूप मधुर माणिक हाला
हे सुमुखि तुम्हारा सुन्दर मुख ही
मुझको कंचन का प्याला
ऐसा लगता है बिन मौसम मेघों ने जल बरसाया है
हे प्रिये सुमुखि ये…….

गंभीर प्रकति है अंतर की
जैसे हो भैरव राग प्रबल
है तन में ऐसी लचक प्रिये
जैसे बहती नदिया का जल
है बरष रहा रस वाणी से ज्यों राग भैरवी गया है
हे प्रिये सुमुखि ये……

 

-राहुल व्यास

 

Rahul Vyas
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