Hate Story | Mid Night Diary | Akanki Sharm aka Writer Saahiba

Hate Story :: Writer Saahiba

“मैंने आज तक किसी से इतनी मोहब्बत नहीं की जितनी कि तुमसे नफ़रत कर ली है।”

अवनी ने निकिता की आँखों में आँखें डालकर कहा। उसकी भौएं सिकुड़ी हुई थीं और आँखें आंसुओं से भरी थीं जिन्हें वो सबसे छुपाना चाहती थी। मगर ना चाहते हुए भी एक आँसू उसके गालों को छू गया।

अवनी बेहद ग़ुस्से में थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो किससे, क्या और क्यों बोलती जा रही थी।

निकिता को सब कुछ छीनकर हासिल करने की आदत थी। उसने कुछ वक़्त तक अपने स्वार्थ के लिए अवनी को दोस्त बनाया और एक दिन कबाड़ की तरह उसे अपनी ज़िन्दगी से निकाल फेंका। महीनों तक अवनी उसकी मीठी जुबां के पीछे मन में छिपे ज़हर को पहचान नहीं पायी।

अवनी को कहीं ना कहीं शुरू से ही ये आभास था कि निकिता शायद उसकी दोस्ती के क़ाबिल नहीं है। एक बार को दोस्ती सही लेकिन यक़ीन करने के लायक तो वो बिल्कुल ही नहीं है।

अफ़सोस कि अवनी इस भोलेपन में मारी गयी कि शायद वो ही निकिता के बारे में सब कुछ गलत सोच रही थी। उसने कई बार अपने मन में उमड़ते इस तरह के ख़यालों को क़ाबू में करने की कोशिश की मगर ये कोशिश हर बार उसका ही दिल चीर देती थी। बिना किसी कारण वो ख़ुद ही को गुनहग़ार समझने लगी थी।

अकल की कच्ची थी अवनी। निकिता की मक्कारियाँ कभी उसकी समझ में आईं ही नहीं। अवनी के दोस्तों ने उसे आगाह किया, समझाया भी, पर उसे इस बात पर तब तक ऐतबार नहीं हुआ जब तक निकिता ने उससे उसके एक बहुत अच्छे दोस्त अजय को उससे छीन नहीं लिया।

अजय का अचानक अवनी से नफ़रत कर बैठना अवनी की समझ से बाहर था। उसे अपने और अजय के बीच दूरियां महसूस तो हो रहीं थीं लेकिन किसी भी तरह से वो इन दूरियों का सबब समझ नहीं पा रही थी। इस दौरान कुछ महीनों में अवनी निकिता के चरित्र को समझने की कोशिश कर रही थी। उसके झूठ, उसकी मक्कारियां, उसका ओछापन, उसका छिछोरापन, उसका बेवजह का घमंड, उसके नखरे – ये सभी कुछ चरम सीमा पर था। शायद अजय का साथ था जो उसकी नीचता के आत्मविश्वाiस की कोई सीमा नहीं थी।

धीरे-धीरे अवनी ने भी अजय से दूरियां बढ़ाने की पहल शुरू कर दी। महीनों बीत गए थे उन्हें एक साथ मुस्कुराये। एक-दूसरे की दोस्ती पर शक की सुइयां घूमने लगीं थीं।

निकिता अपने नापाक इरादों में लगभग सफ़ल हो ही रही थी मगर उसकी आस अधूरी तब रह गई जब ख़ुदा ने किसी तरह अवनी और अजय के बीच सभी गिले-शिक़वे दूर कर दिए।

अजय ने एक दिन बहुत शराब पी ली थी। उसने आधी रात को अवनी को एक मैसेज लिख भेजा- “मैं तुमसे कहना चाहता हूँ कि तुम मेरी बहुत अज़ीज़ दोस्त हो जिसे मैं कभी खोना नहीं चाहता।”

अब किसी के पास ख़फ़ा होने की कोई वजह नहीं थी। एक ही पल में सब कुछ फिर से पहले जैसा हो गया था।

आज दफ़्तर में अजय का आख़िरी दिन था। अवनी ने ख़ुश होकर उसे विदा किया। दोनों ने एक-दूसरे से सदा जुड़े रहने का वादा किया। निकिता उस दिन एक कोने में खड़ी आँसू बहा रही थी। उसे इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं हो पा रहा था कि आख़िर कैसे अजय और अवनी जन्मों- जन्मों के बिछड़े दोस्तों की तरह एक-दूजे की बातों में लीन हो गए थे।

इधर अजय दफ़्तर से निकला और उधर निकिता आग-बबूला हो अवनी पर हावी होने को चली आयी। न जाने क्या-क्या बका उसने। अवनी बहुत देर तक चुपचाप बर्दाश्त करती रही। निकिता को एक करारा थप्पड़ जड़ने के लिए उसका हाथ उठा तो था मगर उसने सिर्फ़ अपनी नफ़रत ज़ाहिर कर झगड़े को अंजाम दे दिया।

लोग अब तक सिर्फ़ अवनी की कलम की ताक़त से वाक़िफ़ थे। आज मगर सभी उसकी ऊंची आवाज़ सुन भौचक्के थे।

 

-राइटर साहिबा 

 

Akanki Sharma (Writer Saahiba)
Akanki Sharma (Writer Saahiba)
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