Happy Diwali | Mid Night Diary | No firecrackers for Delhi-NCR | Roshan 'Suman' Mishra

Happy Diwali | No firecrackers for Delhi-NCR | Roshan ‘Suman’ Mishra

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे बिक्री पर क्या आदेश दिए है या सुझाव, इसका हमारे गाँव के रजेस को इसकी कोई परवाह नहीं है… उसको तो इस बात कि चिंता खाये जा रही कि उसकी एकमात्र ‘पटाखा’ इस बार दिवाली में घर आयेगी या भोपाल में बीटेक की पढ़ाई ही करेगी.. देखिये न जले हुए फूलझड़ी जैसा उसका मुंह मुझसे देखा नही जाता..लग रहा है कि किसी ने उसके दिल पर आकाश तारा दिया है…

लेकिन वो भी क्या दिन थे जब रजेसबा ने काली माई आ बरम बाबा को प्रसाद चढ़ाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद डरते-डरते “आई लभ जू स्वीटी जी ” कहा था… जबाब तो उधर से कुछ नहीं आया… उल्टे स्वीटी जी ने उसे फेसबुक पर भी ब्लाक कर दिया….

गाँव के कुछ वरिष्ठ प्रेमी बताते हैं कि तब दिल टूट के कांग्रेस पार्टी हो गया था उसका, कितना एन्जेल प्रिया टाइप फेक आईडी बनाकर रिक्वेस्ट भेजा.. लेकिन सब ब्लॉक। उसे समझे में नहीं आ रहा था कि वो इंजिनीयरिंग पढ़ने गयी है या दिल तोड़ने का कोई डिग्री लेने…. मन से मनमोहन जी की कसम बहुते रोया था…

देखिये न आज सुबह से उसी के ख्यालों में खोया है… आ जाती एक बार तो कम से कम देख तो लेता… अल्ताफ राजा के सात पुश्तों की कसम…. बेवफा हुई तो क्या हुआ.?..पिआर तो आज तक उसके लिए दिल के इनबॉक्स में सेव है….. पता नही छह महीना में कितना मोटा गयी है… बीटेक में एडमिसन से पहले कितना नीक लगती थी न.. आखिरी बार जब स्कूटी से कॉलेज गयी थी तब देखते ही लगता था जैसे थ्री इडियट की प्रिया हो….

उधर जब से वो बीटेक करने गयी है इधर गाँव के कुछ लरके ठीकेदार बनकर सड़क बिगाड़ने का काम करने लगे हैं…. कुछ शरीफ प्रेमी भी थे… जो बेचारे आजकल कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहे हैं… बचे-खुचे अभी बीजेपी में पार्टी के अमित शाह बनने की कोशिश कर रहे हैं….

अब यही दीवाली में आती है…. .सो सभी दिल जलों को उसके छत पर दिया जलाने का इंतजार रहता है….स्वीटी का दिया जलने के बाद लगता है कि आज दीवाली है। वरना स्वीटी के बिना गाँव की दीवाली और मुहर्रम में कोई अंतर नहीं।

खैर छोड़िये महराज इ सब..देखिये न आज हमारी परमेसरी भौजी ख़ुशी के मारे उछल-कूद रहीं हैं… कल ही से स्वच्छ घर अभियान जारी है…. घर-आँगन, चौके- चूल्हे से माटी की सोंधी-सोंधी खुश्बू आ रही है… गाय के गोबर से आँगन लीपा रहा है…एक अजीब सी सुगन्ध चारो ओर फैली है…. आज भौजी का परेम इतना न निकल रहा है कि ख़ुशी के मारे दो बार आँगन बुहार दिया है…. आकशवाणी दरभंगा से बज रही लोकगीत “मोरा अंगना मे उइग गेलई चान रे… सखी एला पिया मोरा गाम रे” इनकी प्रेम को सरोबार कर रही है उ का है कि कल डेढ़ साल बाद उनके लच्छो भैया पवन एक्सप्रेस से घर जो आ रहें हैं…. उनके लिए बम्बई से कंगन, हार, नथिया सब बनवाके ला रहे हैं।…..

लिजिये इधर हमारे परतिराम चचा (कुम्हार) भी बड़ी ब्यस्त हैं.. जबसे ई चाईनीज सामान के खिलाफ देश में अभियान चल रहा है…. तबसे इतना न डिमांड हो गया है कि आज पनरह दिन से लगातार दीया ही बना रहें हैं…. कितना खुश हैं इस बार हैं कि बताया नहीं जा सकता…. हर साल बेचारे बाजार से चाइनीज बत्ती बेचने वालों को गरियाकर चले आते थे…. लेकिन इस बार तो भाव भी टाइट है चचा का…

लेकिन मैं इस फेसबुक को बार-बार देखता हूँ…. देख रहा हूँ हर आदमी बुद्धिजीवी हो गया है… सब अपने अपने ढंग से सही-गलत कि आलोचना कर रहे हैं… अपने बेटे-बेटी का खबर न रखने वाले कामरेड महेंदर भी फेसबुक पर लिख रहा है “सुप्रीम कोर्ट का निर्देश सोलह आना जायज है दिवाली में इस पटाखों से न जाने बहुत हादसे हुए हैं कितने लोग बुरी तरह से जल जाते हैं अगेरह वगेरह…..

सोच रहा किस-किस पर तरस खाऊँ….. उस राजेसबा पर, उस परमेसरी भौजी पर, उस परतिराम चचा पर या फेसबुक के इन घनघोर बुद्धिजीवीयों पर…. तरस आता है कभी-कभी….फेसबुक और राजनीतिक समर्थन और विरोध को ही दुनिया मान चूके लोगों पर…

शायद ये नहीं जानते कि रजेसबा का इंतजार कितना प्यारा है ये जानते हुए भी कल स्वीटी जी ने फेसबुक पर स्टेट्स डाला है “आई एम् इन रेलाशनशिप”….

या उस परमेसरी भौजी की ख़ुशी किसी के जीत-हार पर हजार गुना भारी है जो पिया के आने पर सोलह श्रृंगार मे सत्रहवाँ रंग जमा रही है…

परतिराम चचा के दिये में जल रही उम्मीद की लौ कितनी सुंदर है…. जो आस मे बैठे हैं इस बार ज्यादा बिक्री हो गयी तो चाक का बरका मशीन लगवा लेंगे…..

दिल से आवाज निकलती है….“अरे ! ये बहस बन्द करिये महराज… आप कुछ दिन में मानसिक बीमार हो जाएंगे.. अब तो बाहर आ जाइये….दीपावली आ गया…. हंसी-ख़ुशी से मनाइये…. आपको वो खुशी थोरी ही मिल सकती है उस 2 BHK के घर में… जहां पत्नी और अपने बच्चे ही बस परिवार का हिस्सा है… जहां बूढी माओं को वृद्धाश्रम का रास्ता दिखा देते हो…. जहां व्यस्त भरी जिनगी में दो मिनट भी अपने बच्चों के संग नहीं गुजार रहे हो…. जहां टेक्नोलोजी के इस दौर मे ब्लू व्हेल जैसे गेम में हाथ पैर काटना उसका टास्क बन जाता है…. जहां गरीब को दो रुपए देने पर भी सल्फी लेते हुए पोस्ट करते हो “me with फलाना” अरे साहब ये सब कृत्रिम खुशियाँ हैं…. कितना भी रंग गढ़ दोगे फिर भी एक रंग प्रेम का तो छूट ही जाएगा…

प्रेम देखना है तो… कभी आइये गाँवों में…. देखिये रमेसर को जिसके छत इस सावन मे चुने लगा है… भले ही उसके घर से बरसात मे पानी कि बूंद टपक रही थी लेकिन कहीं से गम के बूंद नही टपक रहें है…

देखिये महेसर को बाढ आने से खेतों के सारे धान दह गए हैं भले ही उसके घर मे अनाज कम हो गया होगा.. फिर भी अपने माँ के संग नमक रोटी खाते हुए जो आनंद मिलता हैं वर्णन नही किया जा सकता…..

देखिये बुझारन को जो पुरे दिन रिक्सा चलाने के बाद थके हारे जब घर आता है फिर भी अपने रकेस को रिक्से पर बिठा कर घुमाने के लिए ऊर्जा कहाँ से मिलती है, क्या आपको मालुम है?…..

देखिये कभी मिंटूआ, पिंटूआ को गोली खेलते हुए, गुल्ली डंडा खेलते हुए उसकी एकाग्रता को…. टायर नचाते हुए दुनिया को नापने की कोशिश भी क्या उसका टास्क है?…

देखिये कभी सुलेखिया को जो अपने सब से चुराते हुए भी पैसे की तंगी से जिनगी जी रही अपने परोस की परबतिया को रोटी भात दे जाती है… लाख झगरा होने पर भी गोतनी के बच्चों को त्योहारों की मिठाई दे जाती है… तब कोई सेल्फी लेने का मन नही करता है…. क्योंकि ये सब प्राकृतिक खुशियाँ हैं जिसपर प्रेम के एक भी रंग नही छूट रहे हैं…..

साहब आप भी इस रंग मे अगर रंगना चाहते हैं तो इस दिवाली में अपने बूढ़े माँ-बाप के संग दो पल बिताइए…. अपने बच्चों को गाँव घुमा लाइए… किसी गरीब कुम्हार से से दो चार दस दीया-बाती खरीद लिजिये…. किसी बुजुर्ग रिक्शे वाले को दो-चार-दस रुपया अधिक दे दीजिये…. अपनी कामवाली, अपने धोबी, अखबार वाले, दूध वाले से पूछिये कि उनकी दिवाली कैसे मनेगी…?

भाई साहब, ये खूबसूरत जिंदगी सिर्फ पॉलिटिकल विमर्श नहीं है…. जिनकी जिंदगी ही पालिटिक्स है वो संसार के सबसे दुर्भाग्यशाली लोग हैं…. उनको करीब से देखियेगा कभी.. ये जीवन तो संगीत है…. जहाँ प्रेम एक राग है… होली दीपावली इसके शुद्ध स्वर हैं… जिससे ये जीवन संगीतमय प्रेममय और आनंदमय बनता है।

सबको धनतेरस, दीवाली की अग्रिम शुभकामनाएं !

 

-रोशन ‘सुमन’ मिश्रा

 

Roshan 'Suman' Mishra
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