Halchal Almaari Ke Andar Ki | Bhavna Tirange Ki | Manjari Soni

हलचल अलमारी के अंदर की| भावना तिरंगे की | मंजरी सोनी

”सारा सामान निकाल कर जॉंच लो और जमा दो,ध्‍यान र‍हे कल सुबह कुछ परेशानी ना हो।” जैसे ही ये आवाज़ आई अलमारी के अंदर कुछ हलचल सी होने लगी।

अलमारी में रखा तीरंगा मुस्‍कुराया और देशभ‍क्ति गीतों की कैसेटों से बोला आज तारीख क्‍या हैं ? तो जवाब मिला,जनाब 5 महीने बीत चुके है,अब आप समझ जाइए तारीख क्‍या होगी।

तभी हमारे इतिहास को गौरान्‍वित करने वाले महापुरूषो की तस्‍वीर थामे खड़ी फ्रेम बोली “25 जनवरी है आज और कल 26 जनवरी हमारा संविधान दिवस” इतने में उबासी लेते हुए संविधान की किताब बोली ”क्‍यों शोर मचा रहे हो, अच्‍छा भला सो रहा था”, तब तिरंगा बोला ”हॉ तुम तो सच में सो ही रहे हो”, ”भाई अब आप फिर से ना शुरू हो जाए, मैं तो सिर्फ एक किताब हुँ” चिड़ते हुए संविधान की किताब बोली।

कल तो खुशी का दिन है आप इतने गुस्‍से में क्‍यों है?कैसेटों ने सवाल किया। किस बात कि खुशी खुशी तो त‍ब होती जब मेरी शान को संभाला जाता मेरे रंगो को धर्मो में ना बॉंटकर उनके मतलब को समझा जाता,हर साल आज के दिन एक सा भाषण देने की जगह उन भाषणों की बातों पर अम्‍ल किया जाता, कितनी खुशी होती जब मेरा देश का एक भी नागरीक भुखा नहीं सोता,कितनी खुशी होती जब हर बच्‍चा शिक्षित होता, मेरी हर बेटी सुरक्षित होती ,कितना चैन मिलता जब कल का दिन जिम्‍मेदारी पुरी करने की वज़ह मुझे शान,सम्‍मान अौर गर्व के साथ लहराया जाता अौर सिर्फ़ कल ही नहीं रोज देशभक्ति गाने बजाए जाते और स्‍वर्णिम् इतिहास लिखने वाले महापुरूष को रोज याद किया जाता आजाद हवा में सॉंस ले पाने के लिए रोज उनका शुक्रिया अदा किया जाता।

लेकिन एेसा कुछ नहीं हैं ये निकम्मे तो मेरी प्यारी भारत माँ को ख़ून के आँसु रुला रहे हैं, दंगे फ़साद हर जगह अशांति फैला रहे हैं। धर्मों के नाम पर लड़कर इंसानियत को शर्म सार कर रहे हैं।

तिरंगा अपनी बात कह ही रहा था कि इतने में आफिस के कर्मचारी ने अलमारी खोल दी और हर साल की तरह 26 जनवरी का सामान बोलते हुए उन सब को उठाया और सजा दिया मेज़ पर। दुसरे दिन हर साल की तरह नियमित कार्यक्रम हुआ नेताजी का नियमित भाषण अौर फिर अगले 6 महीनो के लिए देशभक्ति की जिम्‍मेदारी से मुक्ति।

 

-मंजरी सोनी

 

Manjari Soni
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