Aazadi

अल्पना बालकनी में बैठी सामने पार्क में खेल रहे बच्चे को एकटक निहार रही थी, एक तरफ बच्चे के चेहरे पर मुस्कान खिली थी तो अल्पना अनिमेष नेत्रों से उस मुस्कान को गीला कर रही थी।उसकी आँखों से न खुशी की चमक के मोती टपक रहे थे,न ही वात्सल्य बह रहा था। मालूम होता था कि आंखे आंतरिक घावों से रिस रहे खून को बहा रही हों। लाल कानों ,नाक के छिद्र बड़े करके ,दांत पीसते हुए वो रेलिंग को पकड़कर कुछ यूं दबा रही है कि बस अभी उसे कांच के ग्लास के तरह चकनाचूर कर देगी। अचानक वो उठी और उसने गमला नीचे फेंक दिया ।शायद उसे ताजा खिले गुलाब के गुलाबीपन ,सुंदरता और शांति से चिढ़ हो रही है।

कब का कलम छोड़ चुकी अल्पना आज किसी को कुछ लिखने बैठी है वो खुद समझ न पा रही है कि शुरू कहाँ से करे?

उसने शुरू किया

घृणित जानवर,

तुम्हें पता है आज पापा आये थे उनके सामने सर से पल्लू गिर गया । मेरे गले और पीठ पर वो लाल निशान देखने पर भी चुप रहे और पता नहीं क्या हुआ अचानक से उठकर चले गए। तुम जो रोज़ पी पीकर बोतलें मेरे सिर पे फोड़ते हो वो अब मुझे चुभना बन्द हो गईं हैं । किसी तरह पैर घसीट घसीटकर चल तो लेती हूं पर मैं आज अपाहिज नहीं फिर भी अपाहिज हूं। इस घर की दीवारों पर टँगी अदृश्य जंजीरें मुझे साफ दिखाई देती हैं । मैं तुम्हें क्या कहकर संबोधित करूँ । तुम जानवर होते तब भी ठीक था कमसकम वो अपने स्वजनों को तो बक्श देते हैं ।पर तुम तो सिगरेट पीकर उसे बुझाने को मेरा बदन खोजते हो । अब तो मेरे गाल भी पत्थर हो चुके हैं तुम्हें चोट लग जाती होगी न। अब खुद को खुद में होम देने का मन करता है पर मैं कायर नहीं। अब इन बेड़ियों को पिघलाकर दम लूंगी , न न अब जंजीरें पिघलेगी नहीं काट दी जाएंगी। अब जानवर के शिकार की बारी आ गयी।

तुम्हारा नित्य आहार

‘अल्पना’

दरवाजा खुला है सफेद बेडशीट खून से सनी है कोई 6 फुटिया आदमी उस पर पेट के बल पड़ा है। एक गोल दीवार घड़ी की टिकटिक से कमरा गूंज रहा है। एक आधी टूटी हुई कांच की बोतल जिसपे खून लगा है दरवाजे के पास पड़ी है। वहीं दरवाजे से थोड़ी दूर अधनन्गे अचेत बदन पड़ी अल्पना असहाय आंखों से कभी अपने हांथों को तो कभी बोतल को निहार ले रही है। पर जब कभी वो बेड की ओर नजरें घुमाती है तो उसकी आँखों में पिंजरे से आज़ाद हो चुके पंछी की सी गर्व और खुशी की चमक आ जाती है ।

आजकल वो सलाखों के पीछे आजादी को जी रही है।

-अनुभव बाजपेयी ‘चश्म’

Anubhav Bajpai Chashm
Anubhav Bajpai Chashm
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