Fark Padta Hai | Mid Night Diary | Aman Singh | #BenaamKhat

फर्क पड़ता है | अमन सिंह | #बेनामख़त

‘फ़र्क नहीं पड़ता है’ कहने से कितना फ़र्क पड़ता है, कभी सोचा है तुमने? हर रात जब बातों को टालकर तुम यूँ ही सोने चली जाती हो, तो कभी सोचा है तुमने या जानने की कोशिश की है कि मुझे नींद आती भी है या नहीं।

हर बार तुम्हारा नाराज़ होकर यह कहना खुद को ज़ाहिर करना सीखो, वरना एक रोज़ हर कोई दूर हो जायेगा।

बिल्कुल भी गलत नहीं है, लेकिन ज़ाहिर करने से भी कहाँ कोई रुकता है? अगर ऐसा होता तो शायद तुम जाने की बात नहीं करती और न ही यह सारी बातें होती जो आज हमारे दरमियाँ सबसे ज्यादा होती हैं।

हर बार सबकुछ कहना ही क्यों जरूरी है? क्यों खुद को ज़ाहिर करना इतना अहम है कि खामोशी को एक किनारे कर दिया है तुमने। न मैं सही हूँ न ही तुम गलत हो, बस हम थोड़े से अलग हैं और इस थोड़े से अलग में हम कितने दूर हैं… खैर जाने दो हर बार की तरह.. क्यों कि खामोशी तुम समझोगी नहीं और अब इससे ज्यादा हमसे कुछ बयान होगा नहीं।

 

-अमन सिंह

 

Aman Singh
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