एक उम्र गुज़ारी है | शाश्वत सिंह | #अनलॉकदइमोशन

एक उम्र लग गई है मुझको सबको यह समझाने में
कुछ तो सच होता ही है हर झूठ है अफ़साने में

इस ज़माने को ऐसी नज़रों से ना देखो यारों
भूल न जाना तुम भी रहते हो इसी ज़माने में

खता जो उन्होंने की थी वह तो याद नहीं होगी
पर हाँ सारी उम्र लगा दी मेरी भूल भुलाने में

तू अब जा कर लिपट जा उससे मैं एक भी शब्द नहीं कहूंगा
पर तेरे भी हाथ जलेंगे जानम मुझे जलाने में

वह कहती है मैं अपने बारे में सब बतला दूं उसको
पर रह जाएगा काफी कुछ उसको सब कुछ बतलाने में

सच कहता तो शायद रिश्ते चाक ना होते यूं “दर्पण”
एक उम्र गुज़ारी है मैंने भी खाली बात बनाने में

 

-शाश्वत सिंह 

 

Shashwat Singh
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