Ek Shaam | Mid Night Diary | Aman Singh | The Last Meeting

Ek Shaam | Aman Singh | The Last Meeting

याद है तुम्हें, कुछ हफ्तों पहले.. शाम के वक़्त साथ बैठे हुये, तुमनें मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया था और मैं बिना एक लफ्ज़ कहे, आँखों के अश्क़ों से कितना कुछ कह गया था।

मेरे दिल का हाल, मेरी उलझन, मेरे मन की बात सब कुछ, हाँ सबकुछ.. मेरे बिना कुछ कहे सबकुछ समझ गयी थी तुम। तुम्हारा प्यार भरी नजरों से देखना, सीने से लगाना या फिर, हाँथों को यूँ ही थाम लेना..

बस मुझे मेरे होने का एहसास दिला जाता है। मुझे कुछ चाहिये नहीं तुमसे, बस वही एक शाम दुबारा चाहता हूँ।

कि बस आकर तुम एक बार फिर से उसी तरह सीने से लगा लो मुझे, अपने हाँथों से मेरे हाँथों को थामकर मुझे मेरे होने का एहसास वापस कर दो मुझे।

अपनी आँखों में डूब जाने दो मुझे.. कभी भी तुमसे कुछ नहीं माँगूँगा बस वही एक शाम लौटा दो मुझे।

 

 

-अमन सिंह

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