Ek Kali | Mid Night Diary | Divyanshu Kashyap TEJAS

एक कली | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

मेरे घर मे भी उजाले की एक कली आए।
मैं चाहता हूँ की पूरे गांव में बिजली आए।

कोई देखे छज्जे से अपनी झुल्फों के बीच से,
मेरी मोहब्बत में भी ऐसी एक गली आए।।

सर्द मौसम में ठिठुरते हाथ हो हम दोनों के,
तभी संग मिर्च की चटनी के मूंगफली आए।।

बर्तन गाड़ी ज़ेवरात की जरूरत नही हमको,
पर दुल्हन मेरे घर जो भी आए भली आए।।

बेक़रारी मिलने की हो हम दोनों को ऐसी,
मैं इधर से चला आऊँ तू उधर से चली आए।।

भूख बढ़ा देती है स्वाद हमेशा से खाने का,
फिर खाने में रोटी चाहे कितनी ही जली आए।।

ऐसी आबोहवा ह्यो जाए मेरे हिन्दुस्तान की,
कि तेजस अज़ान दे औ’ आरती करने अली आए।।

 

– दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

 

Divyanshu Kashyap TEJAS
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