एक बात! | अमन सिंह | #बेनामख़त

एक बात कहना चाहता हूँ तुमसे, एक अर्से से.. पर.. पता नहीं क्यों, शब्दों को कभी जोड़ ही नहीं पाया, कभी कह ही नहीं पाया जो तुमसे कहना चाहता हूँ। पर अब और नहीं, इन अल्फाजों को मैं इस कागज़ पर उतार दिल का सारा बोझ कम कर देना चाहता हूँ।

थक चूका हूँ खुद से बातें करते करते और अब ये झूट दिल को और बहला नहीं सकता, अब तुम्हारी यादें नहीं तुम्हारी जरूरत है मुझे, सुन लो मैंने कह दिया जो मुझे कहना था। हाँ, मुझे… तुम्हारी जरूरत है। बहुत से ख्याल यूँ ही जहन में दम तोड़ देते हैं। यूँ तुमसे दूर चले जाना आसान नहीं था पर क्या करता जो मैंने कहना चाहा तुमने सुना भीं नहीं, लेकिन वक़्त की तरह इस स्याही को अब जाया न होने दूंगा, रोज यूँ ही तुम्हें एक बेनाम ख़त लिखूंगा, उन आधूरी बातों के साथ जिन्हें मैं किसी से कह नहीं पता।

678total visits,2visits today

Leave a Reply