Ek Adhoori Kavita | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee

एक अधुरी कविता | अदिति चटर्जी 

क्या कभी किसी कविता को अधूरा छोड़
तुमने बेमन से दूसरे काम को ‘हाँ’ कहा है?
महसूस किया है क्या उस ‘हाँ’ का
खरखस होना और गले का चीर जाना,

जिसपे खून भी आ गया होगा शायद
पर इतना नहीं की तुम्हारी कमज़ोरी का सबूत दे,
जज़्बातों से रिसता दिल का कोना,

सीने का भरी होना,
लबरेज़ ख्यालो से मन का
चुपके-चुपके सिसकना,
रोना-धोना..

और वो आख़िरकार दुबारा पन्नों पे उतरते जज़्बात,
इत्मिनान का वो पल,
तसल्ली भरी साँसो का होना,

कितना ही सुकून दे जाता है
एक अधुरी कविता को पूरा कर पाना..
तुमने कभी महसूस किया है क्या?

 

-अदिति चटर्जी 

 

Aditi Chatterjee
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